मानव रोग
रोग : शरीर या उसके किसी अंग के सामान्य कार्य में किसी प्रकार की रुकावट या असंतुलन पैदा होना, जिसके स्पष्ट लक्षण (Symptoms) दिखाई दें, रोग या बीमारी कहलाता है।
स्वास्थ्य (Health): WHO के अनुसार, स्वास्थ्य केवल बीमारी की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूरी तरह ठीक होना है।
वाहक (Vector): वह जीव जो रोगजनक को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाता है जैसे मादा एनाफिलीज़ मच्छर)।
रोगजनक (Pathogen): रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीव - जीवाणु, वायरस, कवक आदि।
1. जीवाणु (Bacteria) जनित रोग
1. टिटनेस (Tetanus)
जीवाणु: Clostridium tetani
खोजकर्ता: आर्थर निकोलियर (Arthur Nicolaier)
संक्रमित अंग: तंत्रिका तंत्र (Nervous System) एवं मांसपेशियां
- इसे 'धनुषटंकार' या 'Lockjaw' भी कहते हैं।
- बचाव: DPT टीका एवं ATS (Anti-Tetanus Serum) इंजेक्शन।
2. निमोनिया (Pneumonia)
जीवाणु: Streptococcus pneumoniae (या Diplococcus pneumoniae)
खोजकर्ता: एडविन क्लेब्स (Edwin Klebs)
संक्रमित अंग: फेफड़े (Lungs / कूपिकाएँ - Alveoli)
- फेफड़ों की थैलियों में तरल या मवाद भर जाता है, जिससे सांस लेने में तीव्र कठिनाई होती है।
3. टाइफाइड (Typhoid / मियादी बुखार)
जीवाणु: Salmonella typhi
खोजकर्ता: कार्ल जोसेफ एबरथ (Karl Joseph Eberth)
संक्रमित अंग: आँत (Intestine)
- इसे 'आँत का बुखार' (Enteric Fever) भी कहा जाता है।
- पहचान परीक्षण: विडाल टेस्ट (Widal Test)।
4. हैजा (Cholera)
जीवाणु: Vibrio cholerae (कॉमा के आकार का जीवाणु)
खोजकर्ता: रॉबर्ट कोच (Robert Koch)
संक्रमित अंग: छोटी आँत (Intestine) एवं पाचन तंत्र
- दूषित जल और मक्खियों द्वारा प्रसार।
- लगातार उल्टी-दस्त से गंभीर निर्जलीकरण (Dehydration); उपचार: ORS घोल।
5. डिप्थीरिया (Diphtheria)
जीवाणु: Corynebacterium diphtheriae
खोजकर्ता: एडविन क्लेब्स एवं फ्रेडरिक लोफ्लर (Klebs & Löffler)
संक्रमित अंग: गला / श्वास नली (Throat / Respiratory tract)
- गले में कृत्रिम झिल्ली बन जाने से दम घुटने लगता है।
- पहचान परीक्षण: शिक टेस्ट (Schick Test)।
- बचाव: DPT टीका।
6. टी.बी. / क्षय रोग (Tuberculosis)
जीवाणु: Mycobacterium tuberculosis
खोजकर्ता: रॉबर्ट कोच (Robert Koch)
संक्रमित अंग: मुख्यतः फेफड़े (Lungs)
- पहचान परीक्षण: मोंटू टेस्ट (Mantoux Test)।
- रोकथाम टीका: BCG (Bacillus Calmette-Guérin)।
- उपचार पद्धति: DOTS (Directly Observed Treatment, Short-course)।
7. प्लेग (Plague)
जीवाणु: Yersinia pestis (या Pasteurella pestis)
खोजकर्ता: अलेक्जेंड्रे येर्सिन (Alexandre Yersin)
संक्रमित अंग: लसिका ग्रंथियां (Lymph Nodes), फेफड़े एवं लाल रक्त कणिकाएं
- इसे 'काली मौत' (Black Death) कहा जाता है।
- वाहक: चूहों के शरीर पर पाए जाने वाले पिस्सू (Xenopsylla cheopis)।
8. कुष्ठ रोग (Leprosy)
जीवाणु: Mycobacterium leprae
खोजकर्ता: गेरहार्ड हेन्सेन (Gerhard Hansen)
संक्रमित अंग: तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nerves) एवं त्वचा
- इसे 'हेन्सेन रोग' (Hansen's Disease) भी कहा जाता है।
- शरीर के अंगों में संवेदनशीलता (Sensation) समाप्त हो जाती है।
- उपचार: MDT (Multi-Drug Therapy)।
02. विषाणु (Virus) जनित रोग
1. एड्स (AIDS)
विषाणु: HIV (Human Immunodeficiency Virus — यह एक Retrovirus / RNA वायरस है)
खोजकर्ता: ल्यूक मोंटाग्नियर (Luc Montagnier) एवं रॉबर्ट गैलो
संक्रमित अंग: प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System — विशेष रूप से T4 लिम्फोसाइट्स / CD4 सेल्स)
- पूरा नाम: Acquired Immuno Deficiency Syndrome
- प्राथमिक जाँच: ELISA Test (Enzyme-Linked Immunosorbent Assay)
- पुष्टिकरण जाँच: Western Blot Test
- उपचार पद्धति: ART (Antiretroviral Therapy)
2. पोलियो (Poliomyelitis)
विषाणु: Poliovirus (Enterovirus)
खोजकर्ता / टीका निर्माता:
- जोनास साल्क (Jonas Salk): पहला इंजेक्शन वाला मृत टीका (IPV, 1952)
- अल्बर्ट साबिन (Albert Sabin): ओरल पोलियो ड्रॉप (OPV, 1961)
संक्रमित अंग: केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) एवं रीढ़ की हड्डी की मोटर नर्व्स (मांसपेशियों में लकवा)
- संक्रमण का माध्यम: दूषित जल एवं भोजन
3. स्वाइन फ्लू (Swine Flu)
विषाणु: Influenza A (H1N1 strain)
संक्रमित अंग: श्वसन तंत्र (Respiratory System) एवं फेफड़े
- प्राथमिक स्रोत: सूअर (Swine)
- प्रमुख एंटीवायरल दवा: टैमीफ्लू (Tamiflu / Oseltamivir)
- नोट: बर्ड फ्लू का वायरस H5N1 होता है।
4. रेबीज (Rabies / हाइड्रोफोबिया)
विषाणु: Rabies virus (Rhabdovirus — बुलेट के आकार का)
खोजकर्ता (टीका): लुई पाश्चर (Louis Pasteur, 1885)
संक्रमित अंग: केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क एवं रीढ़ की हड्डी)
- वाहक: पागल कुत्ते, बिल्ली या चमगादड़ के काटने से।
- प्रमुख लक्षण: हाइड्रोफोबिया (Hydrophobia) यानी पानी से अत्यधिक भय लगना।
5. डेंगू ज्वर (Dengue Fever)
विषाणु: Flavivirus (Arbovirus समूह)
वाहक (Vector): एडीज इजिप्टी (Aedes aegypti — दिन में काटने वाला मच्छर)
संक्रमित अंग: रक्त (प्लेटलेट्स), पेशियाँ एवं जोड़
- इसे 'हड्डी तोड़ बुखार' (Breakbone Fever) भी कहा जाता है।
- रक्त में प्लेटलेट्स (Thrombocytes) की संख्या में तीव्र गिरावट आती है।
6. चेचक (Smallpox / बड़ी माता)
विषाणु: Variola virus
खोजकर्ता (टीका): एडवर्ड जेनर (Edward Jenner, 1796 — विश्व का पहला टीका)
संक्रमित अंग: संपूर्ण शरीर (विशेष रूप से त्वचा एवं श्लेष्मा झिल्ली)
- WHO द्वारा 1980 में इसे विश्व से पूर्णतः उन्मूलित (Eradicated) घोषित किया जा चुका है।
- नोट: छोटी माता (Chickenpox) का वायरस Varicella zoster होता है।
7. हेपेटाइटिस (Hepatitis / पीलिया रोग)
विषाणु: Hepatitis Virus (Hepatitis A, B, C, D, E)
खोजकर्ता: बारूक ब्लमबर्ग (Baruch Blumberg — Hepatitis B की खोज)
संक्रमित अंग: यकृत (Liver / लिवर)
- Hepatitis B एक DNA वायरस है (अन्य अधिकांश RNA होते हैं) और यह रक्त/शारीरिक द्रव से फैलता है।
- Hepatitis A और E दूषित जल व भोजन से फैलते हैं।
- लिवर में सूजन, बिलीरुबिन का बढ़ना और त्वचा/आँखों का पीला होना मुख्य लक्षण हैं।
03. प्रोटोजोआ (Protozoa) जनित रोग
Trick: "पापा काम पे सोते हैं"
- पा - पायरिया
- का - कालाजार
- म - मलेरिया
- पे - पेचिश
- सोते हैं - सोने की बीमारी (Sleeping Sickness)
1. मलेरिया (Malaria)
परजीवी (प्रोटोजोआ): Plasmodium (विशेषतः P. vivax, P. falciparum — सबसे घातक)
वाहक (Vector): मादा एनाफिलीज़ मच्छर (Female Anopheles)
खोजकर्ता:
- चार्ल्स लावेरन (Charles Laveran): रक्त में मलेरिया परजीवी की खोज की।
- रोनाल्ड रॉस (Ronald Ross): मच्छर द्वारा मलेरिया फैलने की पुष्टि की (नोबेल पुरस्कार विजेता)।
संक्रमित अंग: लाल रक्त कणिकाएं (RBC) एवं प्लीहा (Spleen / तिल्ली)
- कपकपी के साथ तेज बुखार आता है, जो परजीवी द्वारा स्रावित 'हीमोज़ोइन' (Haemozoin) विषैले पदार्थ के कारण होता है।
- पारंपरिक औषधि: सिनकोना के पेड़ की छाल से प्राप्त कुनैन (Quinine)।
2. पेचिश / अमीबियासिस (Amoebiasis / Amoebic Dysentery)
परजीवी (प्रोटोजोआ): Entamoeba histolytica
वाहक / माध्यम: दूषित जल, संदूषित भोजन एवं घरेलू मक्खियाँ
संक्रमित अंग: बड़ी आँत (Large Intestine)
- आँत की दीवारों में घाव हो जाते हैं, जिससे पेट में ऐंठन के साथ मल में श्लेष्मा (Mucus) और रक्त आता है।
3. पायरिया (Pyorrhea)
परजीवी (प्रोटोजोआ): Entamoeba gingivalis
संक्रमित अंग: मसूड़े (Gums) एवं दाँत
- मसूड़ों से खून और मवाद (Pus) आना तथा मुँह से तीव्र दुर्गंध निकलना।
- नोट: यह विटामिन C की कमी से भी गंभीर हो जाता है।
4. कालाजार (Kala-azar / दमदम बुखार / Visceral Leishmaniasis)
परजीवी (प्रोटोजोआ): Leishmania donovani
वाहक (Vector): बालू मक्खी / सैंडफ्लाई (Phlebotomus / Sandfly)
संक्रमित अंग: अस्थि मज्जा (Bone Marrow), यकृत (Liver) एवं प्लीहा (Spleen)
- रुक-रुक कर तेज बुखार, प्लीहा और लिवर का बढ़ना तथा त्वचा का रंग काला पड़ना।
- भारत में यह मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश में देखा जाता है।
5. सोने की बीमारी (Sleeping Sickness / African Trypanosomiasis)
परजीवी (प्रोटोजोआ): Trypanosoma brucei
वाहक (Vector): सीसी मक्खी (Tse-tse fly / Glossina)
संक्रमित अंग: केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) एवं मस्तिष्क
- रोगी को अत्यधिक नींद, मानसिक भ्रम और तेज बुखार आता है।
- समय पर उपचार न मिलने पर रोगी कोमा में चला जाता है।
04. कवक (Fungus) जनित रोग
Trick: "गंजा दामाद खाए फ्रूट"
- गंजा - गंजापन (Baldness / Tinea capitis)
- दामा - दमा (Asthma / Aspergillus fumigatus)
- द - दाद (Ringworm / Trichophyton)
- खाए - खाज (Scabies)
- फ्रूट - एथलीट फुट (Athlete's foot / Tinea pedis)
1. दाद (Ringworm)
कवक (Fungus): Microsporum, Trichophyton या Epidermophyton
संक्रमित अंग: त्वचा (Skin), नाखून एवं सिर की त्वचा (Scalp)
- त्वचा पर लाल रंग के गोल चकत्ते (Rings) बन जाते हैं, जिनमें तीव्र खुजली और जलन होती है।
- यह संक्रमित व्यक्ति के तौलिए, कपड़े या सीधे स्पर्श से तेजी से फैलता है।
2. खाज / खुजली (Scabies)
कारक जीव: Acarus scabies (यह सूक्ष्म घुन / Mite द्वारा होता है, परंतु इसे कवक/त्वचा विकारों के साथ पढ़ा जाता है)
संक्रमित अंग: त्वचा (विशेष रूप से उंगलियों के बीच की खाली जगह, कलाई और कमर)
- त्वचा में बारीक रेखाएं या चकत्ते बनते हैं और रात के समय अत्यधिक तीव्र खुजली होती है।
3. दमा / अस्थमा (Asthma)
कवक (Fungus): Aspergillus fumigatus
संक्रमित अंग: फेफड़े (Lungs) एवं श्वसन नली (Bronchial tubes)
- इस कवक के बारीक बीजाणु (Spores) सांस के माध्यम से फेफड़ों में पहुंचकर कफ और सूजन पैदा करते हैं, जिससे सांस फूलने लगती है और सांस लेने में सीटी जैसी आवाज आती है।
4. एथलीट फुट (Athlete's Foot)
कवक (Fungus): Tinea pedis
संक्रमित अंग: पैरों की त्वचा (विशेषकर पैर की उंगलियों के बीच का भाग)
- पैरों में लगातार नमी और गीले जूते-मोजे पहनने से यह कवक पनपता है।
- पैरों की उंगलियों के बीच की त्वचा कटने-फटने लगती है, सफेद पड़ जाती है और दर्दभरी खुजली होती है।
रोगवाहक कीट एवं उनके द्वारा प्रसारित रोग
1. मादा एनाफिलीज़ मच्छर (Female Anopheles Mosquito)
प्रसारित रोग: मलेरिया (Malaria)
रोगजनक (Pathogen): Plasmodium परजीवी (प्रोटोजोआ)
- केवल मादा मच्छर ही रक्त चूसती है (अंडों के पोषण के लिए), नर मच्छर फूलों का रस पीता है।
- यह मुख्यतः गंदे/ठहरे हुए साफ पानी दोनों में पनप सकती है और रात व शाम के समय अधिक सक्रिय होती है।
2. एडीज इजिप्टी मच्छर (Aedes aegypti Mosquito)
प्रसारित रोग:
- 1. डेंगू ज्वर (Dengue Fever) — Flavivirus
- 2. चिकनगुनिया (Chikungunya) — Chikungunya virus
- 3. पीत ज्वर (Yellow Fever) — Flavivirus
- 4. जीका वायरस (Zika Virus) — Zika virus
मुख्य पहचान व तथ्य:
- इसके शरीर और पैरों पर सफेद और काली धारियाँ होती हैं, इसलिए इसे 'टाइगर मच्छर' (Tiger Mosquito) भी कहते हैं।
- यह साफ व ठहरे हुए पानी (कूलर, गमले, टायरों) में पनपता है।
- यह मुख्य रूप से दिन के समय (Day biter) काटता है।
3. क्यूलेक्स मच्छर (Culex Mosquito)
प्रसारित रोग:
- 1. फाइलेरिया / हाथीपांव (Filariasis / Elephantiasis) — कारक: Wuchereria bancrofti (कृमि/Nematode)
- 2. जापानी एन्सेफलाइटिस (Japanese Encephalitis - JE) — कारक: Flavivirus (मस्तिष्क शोथ)
- यह अत्यधिक गंदे, नाली और रुके हुए पानी में अंडे देता है।
- जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस का प्राकृतिक भंडार (Reservoir) सूअर और जलीय पक्षी होते हैं, जहाँ से क्यूलेक्स मच्छर इसे मनुष्यों में फैलाता है।
4. बालू मक्खी / सैंडफ्लाई (Sandfly / Phlebotomus)
प्रसारित रोग: कालाजार (Kala-azar / दमदम बुखार / Visceral Leishmaniasis)
रोगजनक (Pathogen): Leishmania donovani (प्रोटोजोआ)
- यह सामान्य घरेलू मक्खी से आकार में बहुत छोटी (लगभग एक-चौथाई) और रोएँदार होती है।
- यह नमी वाली जगहों, कच्ची मिट्टी की दीवारों और अंधेरी दरारों में पनपती है।
5. सीसी मक्खी (Tse-tse Fly / Glossina)
प्रसारित रोग: सोने की बीमारी (Sleeping Sickness / African Trypanosomiasis)
रोगजनक (Pathogen): Trypanosoma brucei (प्रोटोजोआ)
- यह मुख्य रूप से अफ्रीकी महाद्वीप के ग्रामीण और सवाना क्षेत्रों में पाई जाती है।
- यह दिन के समय काटती है और इसके काटने से परजीवी सीधे रक्त प्रवाह में प्रवेश कर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है।
प्रमुख टीके एवं प्रतिरक्षण
1. BCG टीका (Bacillus Calmette-Guérin)
रोग से बचाव: टी.बी. / क्षय रोग (Tuberculosis)
खोजकर्ता: अल्बर्ट कैलमेट (Albert Calmette) एवं केमिली गुएरिन (Camille Guérin)
टीके की प्रकृति: जीवित क्षीण जीवाणु टीका (Live Attenuated Bacterial Vaccine)
देने का समय व मार्ग: जन्म के तुरंत बाद (या 1 वर्ष के भीतर) | मार्ग: अंतःत्वचीय (Intradermal — बाएँ ऊपरी हाथ पर)
- यह केवल बैक्टीरिया-रोधी टीका है जो टीबी के गंभीर रूपों (जैसे टीबी मैनिंजाइटिस) से बच्चों की रक्षा करता है।
2. DPT टीका (Triple Antigen Vaccine)
रोग से बचाव (तीन रोग):
- 1. D → डिप्थीरिया (Diphtheria / गलघोंटू)
- 2. P → पर्टुसिस (Pertussis / काली खाँसी / Whooping Cough)
- 3. T → टिटनेस (Tetanus / लॉकजॉ)
टीके की प्रकृति: टॉक्सॉइड एवं निष्क्रिय जीवाणु (Toxoid + Inactivated Bacteria)
देने का मार्ग: अंतःपेशीय (Intramuscular - IM)
- इसे शिशु को 6, 10 और 14 सप्ताह की आयु में प्राथमिक खुराकों के रूप में दिया जाता है।
3. MMR टीका
रोग से बचाव (तीन रोग):
- 1. M - मीजल्स (Measles / खसरा)
- 2. M - मम्प्स (Mumps / गलसुआ)
- 3. R → रूबेला (Rubella / जर्मन खसरा)
टीके की प्रकृति: जीवित क्षीण विषाणु टीका (Live Attenuated Viral Vaccine)
खोजकर्ता: मौरिस हिलमैन (Maurice Hilleman)
देने का मार्ग: सबक्यूटेनियस (Subcutaneous - SC / त्वचा के नीचे)
- यह सामान्यतः 9 से 12 महीने और 15 से 18 महीने की उम्र में दिया जाता है।
विटामिन एवं पोषण
विटामिन को रक्षात्मक पदार्थ भी कहा जाता हैं। विटामिन, एक प्रकार का कार्बनिक यौगिक हैं, इनसे कोई कैलोरी प्राप्त नहीं होती। इनसे शरीर को किसी भी प्रकार की ऊर्जा प्राप्त नहीं होती हैं। शरीर कोशिकाओं में इनका संश्लेषण नहीं होता हैं।
विटामिन की खोज 1911 ई. में F.G. हाफकिन्स ने की थी परन्तु विटामिन नाम फंक नामक विज्ञानिक ने दिया था।
विटामिन दो प्रकार के होते हैं :-
- 1. जल में घुलनशील - B, C
- 2. वसा में घुलनशील - A, D, E, K
विटामिन के खोजकर्ता
- A - वैकुलर 1911
- B - वैकुलर 1911
- B1 - कैसिमिर फंक 1912
- B2 - डी.टी. स्मिथ और ई.जी. हेंड्रिक 1926
- B3 - काॅनरैड एलवेजम 1937
- B9 - लुसी विल्स 1933
- B6 - पाॅल जियोर्जी 1934
- C - ए. होइस्ट और टी. फ्रेलिच 1912
- D - एडवर्ड मेलानबी 1922
- E - हर्बर्ट इवांस और कैथरीन बिशप 1922
विटामिन के रासायनिक नाम
- A: रेटिनॉल
- B1: थायमिन
- B2: राइबोफ्लेविन
- B3: निकोटिनैमाइड या नियासिन
- B5: पैंटोथेनिक अम्ल
- B6: पाईरीडाक्सिन
- B7: बायोटिन
- B9: Folic Acid (फॉलिक अम्ल)
- B12: सायनोकोबालमिन
- C: एस्कार्बिक एसिड
- D: कैल्सिफेरॉल
- E: टोकोफेरॉल
- K: फिलोक्विंनोन
विटामिन की कमी से होने वाले रोग एवं पूर्ति के स्रोत :
Vitamin A : रतौधी ,जीरोप्थैलमिया, संक्रमणों का खतरा, त्वचा शुष्क, त्वचा और झिल्लियों में परिवर्तन का आना, दोषपूर्ण दांत आदि।
पूर्ति के स्रोत : हरी सब्जियां, दूध, टमाटर, पनीर, गाजर, चुकंदर, पीले रंग के फल अंडा, मछलीयकृत तेल
Vitamin B1 : बेरी बेरी, वृद्धि का रुकना, भूख और वजन का घटना, तंत्रिका विकास, थकान का होना, बदहजमी, पेट की खराबी आदि।
पूर्ति के स्रोत : गेहूँ, संतरे, हरे मटर, खमीर, अंडे, चावल, मूँगफली, हरी सब्जियाँ, अंकुर वाले बीज आदि हैं।
Vitamin B2 : त्वचा का फटना, आँखों का लाल होना, वृद्धि का रुकना, धुधली दृष्टि का होना, जीभ पर छाले का पड़ जाना ,असमय बुढ़ापा आना, प्रकाश ना सह पाना आदि।
पूर्ति के स्रोत : खमीर, कलेजी, मांस, हरी सब्जियां दूध आदि हैं।
Vitamin B3 : जीभ का चिकनापान, त्वचा पर फोड़े फुंसी होना, त्वचा पर दाद होना, पाचन क्रिया में गड़बड़ी, मानसिक विकारों का होना, आदि।
पूर्ति के स्रोत : मांस, मुंगफली, आलू, टमाटर, सब्जियां आदि हैं।
Vitamin B5 : बाल सफेद होना, पेशियो में लकवा, पैरो में जलन (बर्निंग फीट), आदि।
पूर्ति के स्रोत : मांस, दूध, मुंगफली, गन्ना, टमाटर आदि हैं।
Vitamin B6 : एनिमिया, त्वचा रोग, मस्तिष्क का ठीक से काम ना करना, शरीर का भार कम होना आदि।
पूर्ति के स्रोत : गाजर, मांस, अनाज आदि हैं।
Vitamin B7 : लकवा, शरीर में दर्द, बालों का गिरना तथा वृद्धि में कमी आदि।
पूर्ति के स्रोत : अनाज, चॉकलेट, अंडे की जर्दी, दही, ओटमील, केला, सेब, बीन्स, ब्रोकली और पनीर आदि।
Vitamin B9 (फॉलिक अम्ल) : एनीमिया, पेचिस रोग आदि।
पूर्ति के स्रोत : दाल, यकृत, सब्जियां, अंडा, सेम आदि हैं।
Vitamin B12 : रक्तअल्पता (रुधिर की कमी), एनिमिया, पांडुरोग।
पूर्ति के स्रोत : मांस, कलेजी, दूध, अंडे आदि हैं।
Vitamin C : स्कर्वी रोग, मसूड़े फूलना, अस्थियों के चारो ओर श्राव, अस्थियां कमजोर होना आदि।
पूर्ति के स्रोत : खट्टे रसीले फल जैसे सन्तरा, नींबू, नारंगी, आँवला, अँगूर, सेब आदि
Vitamin D : रिकेट्स (सूखा रोग), ऑस्टियोमलेशिया, कमजोर दांत, दातों का सड़ना आदि।
पूर्ति के स्रोत : खुली त्वचा पर सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणें पड़ती हैं तो शरीर की विटामिन D की पूर्ति हो जाती है।
Vitamin E : जनन शक्ति का कम होना।
पूर्ति के स्रोत : हरी पत्तेदार सब्जियों, बादाम, कीवी फल, मक्खन, अंकुरित गेंहूँ, वनस्पति तेल, अंडो में, दूध में, अखरोट, सरसों आदि
Vitamin K : रक्त का थक्का न जमना, ऐंठन आदि।
पूर्ति के स्रोत : टमाटर, हरी सब्जियां, आदि हैं।