संवैधानिक विकास

संवैधानिक विकास

1600 ई0 का राजलेख ( चार्टर ) :  ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी वर्ष 1600 में एक व्यापारिक कंपनी के रूप में स्थापित हुई। इंग्लैण्ड की महारानी एलिज़ाबेथ-I ने कम्पनी को पूर्वी देशों के साथ व्यापार की अनुमति प्रदान की थी।
  • कंपनी को नाम दिया - 'द गवर्नर एंड कंपनी ऑफ़ मर्चेंट्स ऑफ़ लंदन ट्रेडिंग इन ईस्ट इंडीज़'
  • कंपनी ने मुगल बादशाह जहांगीर से व्यापार और सूरत में कारखाना लगाने की इजाज़त ली थी।
  • 1 जनवरी, 1874 को कंपनी को भंग कर दिया गया था।
1726 के राजलेख : 
  • कम्पनी को सीमित मात्रा में नियम, उपनियम , अध्यादेश जारी करने की शक्ति दी गई।
  • कलकत्ता , बम्बईं तथा मद्रास प्रेसीडेन्सी के गर्वनरों को विधि बनाने की शक्ति दी गई।
प्लासी का युद्ध (1757 ) - रॉबर्ट क्लाइव VS बंगाल नवाब सिराज-उद-दौला
बक्सर युद्ध (1764 ) - मेजर हेक्टर मुनरो VS बंगाल के नवाब मीर कासिम + बनारस राज्य के महाराजा बलवंत सिंह + अवध के नवाब शुजा-उद-दौला  + मुगल साम्राज्य शाह आलम II { अंग्रेजों ने जीत लिया और ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन बंगाल पर हो गया। }
  • बंगाल के प्रथम गवर्नर - रॉबट क्लाइव
इसके बाद समय-समय पर अनेक एक्ट पारित किये जो भारतीय सविधान के विकास की सीढियां बनी।
पारित प्रमुख एक्ट 

ईस्ट इण्डियां कम्पनी शासन 1773-1858 ब्रिटिश क्राउन शासन 1858-1947
रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 भारत सरकार अधिनियम, 1858
एक्ट ऑफ़ सेटलमेंट, 1781 भारतीय परिषद अधिनियम, 1861
पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 भारतीय परिषद अधिनियम, 1892
चार्टर अधिनियम, 1793 मार्ले-मिंटो सुधार अधिनियम, 1909
चार्टर अधिनियम, 1813 मांटेग्यू-चम्सफोर्ड सुधार अधिनियम, 1919
चार्टर अधिनियम, 1833 भारत शासन अधिनियम, 1935
चार्टर अधिनियम, 1853 भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947

रेगुलेटिंग एक्ट 1773 :
  • इसके तहत बंगाल के गवर्नर का नाम बदल कर गवर्नर जनरल रखा गया और प्रथम गवर्नर जनरल नियुक्त हुआ - वारेन हेस्टिंग्स
  • बंगाल की सर्वोच्च परिषद पर गवर्नर-जनरल के साथ काम करने के लिए 04 सदस्य जॉन क्लेवरिंग, जॉर्ज मॉन्सन, रिचर्ड बारवेल और फिलिप फ्रांसिस नियुक्त किये।
  • बम्बईं तथा मद्रास प्रेसीडेन्सी बंगाल के गवर्नर-जनरल के नियंत्रण में किये।
  • कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय (1774 में ) की स्थापना की गई थी। { प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलीजा इम्पी  तथा अन्य न्यायाधीश चेम्बर्ज, लिमैस्टर और हाइड को नियुक्त कर दिया गया  }
एक्ट ऑफ़ सेटलमेंट 1781 :

  • रेगुलेटिंग एक्ट 1773 की कमियों की दूर किया।
  • इसके तहत कलकत्ता की सरकार को बिहार, बंगाल, उड़ीसा के लिए कानून बनाने का प्राधिकार मिला।
पिट्स इंडिया एक्ट 1784 :
  • गवर्नर जनरल की परिषद के सदस्यों को 04 से 03 कर दिया।
  • कंपनी द्वारा भारत में ब्रिटिश संपत्ति का दोहरा नियंत्रण हुआ। { (बोर्ड ऑफ़ कण्ट्रोल - राजनीति मसलों के लिए ) (बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स - व्यापारिक मसलों के लिए ) }
  • इंग्लैण्ड में एक कोर्ट की स्थापना की गई जो भारत में स्थापित कोर्ट के अधिकारियों के अवैध कार्य के मुकदमें देखेगी।

1793 का राजलेख : 
  • इस अधिनियम ने कंपनी को भारत में ब्रिटिश क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण जारी रखने की अनुमति दी।
  • नियंत्रण बोर्ड के सदस्य और कर्मचारी का वेतन भारतीय राजस्व से दिया जायेगा प्रावधान किया गया।
  • कंपनी का अधिकार अगले 20 वर्षो के लिए बढ़ा दिया गया।

1813 का राजलेख :
  • ईसाई धर्म प्रचारकों को भारत में धर्म प्रचार करने की स्वीकृति प्रदान की गई।
  • भारत के साथ व्यापार पर कंपनी के एकाधिकार को समाप्त कर दिया। परन्तु चीन से चाय का व्यापार ऐसे ही चलता रहेगा।
  • कंपनी द्वारा 1 लाख रुपया भारतियों की शिक्षा पर खर्च करने का प्रावधान किया गया।
1833 का राजलेख :
  • चीन से व्यापार पर कंपनी के एकाधिकार को समाप्त कर दिया।
  • विधि आयोग का गठन किया गया, इसकी अध्यक्षता लॉर्ड मैकाले ने की थी।
  • बंगाल के गवर्नर जनरल को पुरे भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया और भारत के प्रथम गवर्नर जनरल नियुक्त हुआ - लॉर्ड विलियम बेंटिक
1853 का राजलेख :
  • सिविल सेवा परीक्षा की शुरुआत हो गई थी और 1854 लार्ड मैकाले समिति की नियुक्त की गई।
  • इसके तहत कार्यपालिका एवं विधायिका सम्बंधी शक्तियों का पृथक्करण हुआ और गवर्नर जनरल को वीटो का अधिकार मिला।
भारत में सिविल सेवा का जनक - ब्रिटिश जनरल चार्ल्स कॉर्नवालिस
भारत में लोक सेवा आयोग की स्थापना 1 अक्टूबर, 1926 को हुई थी।

भारत शासन अधिनियम 1858 : 
  • कम्पनी का शासन महारानी विक्टोरिया के हाथों में चला गया।
  • भारत का गवर्नर जनरल को भारत का वायसराय बना दिया और भारत के प्रथम वायसराय नियुक्त हुआ - लॉर्ड कैनिंग {1856 से 1862 }
  • बोर्ड ऑफ़ कण्ट्रोल और बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स को समाप्त कर दिया।
  • इसके तहत मुगल सम्राट पद भी समाप्त कर दिया गया।
भारत शासन अधिनियम 1861 : 
  • वायसराय को अध्यादेश जारी करने की शक्ति मिली। जिसे आपातकाल के समय 6 माह के लिए वह जारी कर सकता था।
  • लॉर्ड कैनिंग के द्वारा विभागीय प्रणाली की शुरूवात की गई।
भारत शासन अधिनियम 1892 : 
  • इसके तहत अप्रत्यक्ष चुनाव की शुरूवात हुई थी।
मार्ले-मिंटो सुधार अधिनियम 1909 :
  • इसके तहत साम्प्रदायिक निर्वाचन की शुरूवात हुई जिसके जनक लार्ड मिन्टों है। 
  • साम्प्रदायिक निर्वाचन को लेकर भारत के राज्य सचिव जॉन मॉर्ले ने वायसराय लॉर्ड मिंटो से कहा था "हम नाग के दांत बो रहें है इसका फल भीषण होगा।"
  • केंद्रीय विधान परिषद के सदस्यों की संख्या 16 से बढ़ाकर 60 कर दी गई।
  • वायसराय परिषद मे पहला भारतीय सदस्य सत्येन्द्र प्रसाद सिन्हा को नियुक्त किया गया।
अगस्त घोषणा (20 अगस्त 1917)

घोषणाकर्ता: एडविन मांटेग्यू (भारत सचिव)। इस समय वायसराय रहें - लार्ड चेम्सफोर्ड { कार्यकाल 1916 - 1921 तक }था। इस समय इंग्लैंड का प्रधानमंत्री लाॅयड जार्ज था।

रोलेट एक्ट (1919) / ब्लैक एक्ट : 
  • मूल नाम: द अनार्किकल एंड रिवोल्यूशनरी क्राइम्स एक्ट, 1919
  • उद्देश्य: प्रथम विश्व युद्ध के बाद भारत में बढ़ रही राष्ट्रीय और क्रांतिकारी गतिविधियों को कुचलना।
  • अध्यक्ष: सर सिडनी रोलेट (राजद्रोह समिति)।
  • प्रान्तों में द्वैध शासन की स्थापना की गई :आरक्षित (Reserved): वित्त, पुलिस, राजस्व - गवर्नर के पास और हस्तांतरित (Transferred): शिक्षा, स्वास्थ्य -भारतीय मंत्रियों के पास।
  • नियम: बिना वारंट गिरफ्तारी और 2 साल तक बिना मुकदमे के जेल।
  • केंद्र में द्विसदन: पहली बार उच्च सदन (राज्य परिषद) और निम्न सदन (विधान सभा) बने।
  • मताधिकार: महिलाओं को सीमित वोट का अधिकार मिला; 
  • सिखों, ईसाइयों व एंग्लो-इंडियनों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र बने।
पंडित मोतीलाल नेहरू ने रोलेट एक्ट (1919) के विरोध में नारा दिया था। "ना कोई वकील, ना कोई दलील, ना कोई अपील"। गांधीजी ने इसे 'काला कानून' कहा। पजाब के नेता डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल गिरफ्तार हुए। सीधा असर: जलियांवाला बाग में शांतिपूर्ण विरोध।

जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919)
  • स्थान: अमृतसर (बैसाखी का दिन)।
  • घटना:  शांतिपूर्ण विरोध पर जनरल डायर द्वारा गोलीबारी।
  • जिस कारण 1920 में महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन की शुरुआत की गई।
संस्थान: लोक सेवा आयोग (PSC) के गठन का प्रावधान (1926 में 'ली आयोग' पर गठित)।

समीक्षा प्रावधान: अधिनियम के कामकाज की समीक्षा के लिए 10 वर्ष बाद एक सांविधिक आयोग (Statutory Commission) गठित करने की व्यवस्था थी (जिसके परिणामस्वरूप 1927 में साइमन कमीशन का गठन हुआ)।

साइमन कमीशन विरोध व लाठीचार्ज (30 अक्टूबर 1928) :
  • विरोध का कारण: इसमे सभी 7 सदस्य अंग्रेज (श्वेत कमीशन); किसी भी भारतीय को शामिल न करना।
  • जब साइमन कमीशन लाहौर रेलवे स्टेशन पहुंचा, तो लाला लाजपत राय ने काले झंडों और "साइमन गो बैक" के नारों के साथ इसका शांतिपूर्ण नेतृत्व किया। लाहौर के पुलिस अधीक्षक जेम्स ए. स्कॉट के आदेश पर पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स ने भीड़ पर बर्बरता से लाठियां चलवाईं, जिसमें लालाजी के सिर और छाती पर गंभीर चोटें आईं। चोटों के कारण 17 नवंबर 1928 उनका निधन हो गया।
  • प्रसिद्ध कथन: "मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत की आखिरी कील साबित होगी।"
क्रांतिकारी बदला (सॉन्डर्स हत्याकांड): लालाजी की मृत्यु का बदला लेने के लिए भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और चंद्रशेखर आज़ाद (HSRA) ने 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स को गोली मारकर मौत के घाट उतारा।

गोलमेज सम्मेलन (1930–1932) :
  • स्थान: लंदन (ब्रिटिश पीएम: रैम्से मैकडोनाल्ड)।
  • क्यों हुआ: साइमन कमीशन रिपोर्ट पर चर्चा, सविनय अवज्ञा आंदोलन का समाधान और भावी संविधान (1935 एक्ट की नींव) तैयार करने हेतु।
  • गोलमेज सम्मेलन प्रथम (1930) , द्वितीय (1931), तृतीय (1932) में 
  • तीनों में शामिल: डॉ. बी. आर. आंबेडकर और तेज बहादुर सप्रू।
  • कांग्रेस का रुख: सिर्फ दूसरे गोलमेज सम्मेलन (1931) में भाग लिया (गांधी-इरविन समझौते के बाद गांधीजी प्रतिनिधि बने)।
  • प्रमुख नतीजा: इसी मंथन से भारत शासन अधिनियम 1935 बना।
भारत शासन अधिनियम 1935 :
  • लागू हुआ - 1937 में , निरस्त - 26 जनवरी 1950 को  {अनुसूचियां - 10 , अनुच्छेद - 321}
  • इसके तहत साम्प्रदायिक निर्वाचन का पुनः विस्तार किया गया, जिसमें दलित, मजदूर, महिला आदि वर्ग सामिल किये।
  • यह लॉर्ड लिनलिथगो के नेतृत्व वाली संयुक्त चयन समिति की रिपोर्ट पर आधारित था। लार्ड लिनलिथगो 1936 से 1944 तक भारत के वायसराय थे।
  • राज्य में द्वैध शासन समाप्त कर, केन्द्र में द्वैध शासन किया गया।
  • भारत में संघीय न्यायालय ( 01 Oct 1937 ) की स्थापना की गयी। प्रथम मुख्य न्यायाधीश बने - मॉरिस लिंफोर्ड गियर
  • RBI की स्थापना गई। जिसके पहले गर्वनल जनरल बने - ओसबोर्न स्मिथ
भारत का अंतिम वायसराय - लॉर्ड लॉरेंसमाउंटबेटन {12-02-1947 to 15-08-1947}
इसने भारत को आज़ादी दिलाने के लिए माउंटबेटन योजना ( 3 Jun 1947 ) प्रस्तुत की, जिसे 18 जुलाई 1947 को शाही स्वीकृति प्राप्त हुई। इस समय इंग्लैंड का प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली था।

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 :
  • प्रस्ताव पेश - 4 July 1947, पारित - 18 July 1947 , धाराएं - 20
  • इसके तहत भारत का विभाजन हुआ ( 15 अगस्त 1947 में )
  • वायसराय पद गर्वनर जनरल पद बन गया और स्वतंत्र भारत के प्रथम गर्वनर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन को ही बनाया गया।
  • स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय व्यक्ति गर्वनर जनरल सी. राजगोपालाचारी थे।

मानव रोग (Human Disease)

मानव रोग एवं पोषण नोट्स
मानव रोग

रोग : शरीर या उसके किसी अंग के सामान्य कार्य में किसी प्रकार की रुकावट या असंतुलन पैदा होना, जिसके स्पष्ट लक्षण (Symptoms) दिखाई दें, रोग या बीमारी कहलाता है।

स्वास्थ्य (Health): WHO के अनुसार, स्वास्थ्य केवल बीमारी की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूरी तरह ठीक होना है।

वाहक (Vector): वह जीव जो रोगजनक को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाता है जैसे मादा एनाफिलीज़ मच्छर)।

रोगजनक (Pathogen): रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीव - जीवाणु, वायरस, कवक आदि।

1. जीवाणु (Bacteria) जनित रोग
1. टिटनेस (Tetanus)

जीवाणु: Clostridium tetani

खोजकर्ता: आर्थर निकोलियर (Arthur Nicolaier)

संक्रमित अंग: तंत्रिका तंत्र (Nervous System) एवं मांसपेशियां

  • इसे 'धनुषटंकार' या 'Lockjaw' भी कहते हैं।
  • बचाव: DPT टीका एवं ATS (Anti-Tetanus Serum) इंजेक्शन।
2. निमोनिया (Pneumonia)

जीवाणु: Streptococcus pneumoniae (या Diplococcus pneumoniae)

खोजकर्ता: एडविन क्लेब्स (Edwin Klebs)

संक्रमित अंग: फेफड़े (Lungs / कूपिकाएँ - Alveoli)

  • फेफड़ों की थैलियों में तरल या मवाद भर जाता है, जिससे सांस लेने में तीव्र कठिनाई होती है।
3. टाइफाइड (Typhoid / मियादी बुखार)

जीवाणु: Salmonella typhi

खोजकर्ता: कार्ल जोसेफ एबरथ (Karl Joseph Eberth)

संक्रमित अंग: आँत (Intestine)

  • इसे 'आँत का बुखार' (Enteric Fever) भी कहा जाता है।
  • पहचान परीक्षण: विडाल टेस्ट (Widal Test)।
4. हैजा (Cholera)

जीवाणु: Vibrio cholerae (कॉमा के आकार का जीवाणु)

खोजकर्ता: रॉबर्ट कोच (Robert Koch)

संक्रमित अंग: छोटी आँत (Intestine) एवं पाचन तंत्र

  • दूषित जल और मक्खियों द्वारा प्रसार।
  • लगातार उल्टी-दस्त से गंभीर निर्जलीकरण (Dehydration); उपचार: ORS घोल।
5. डिप्थीरिया (Diphtheria)

जीवाणु: Corynebacterium diphtheriae

खोजकर्ता: एडविन क्लेब्स एवं फ्रेडरिक लोफ्लर (Klebs & Löffler)

संक्रमित अंग: गला / श्वास नली (Throat / Respiratory tract)

  • गले में कृत्रिम झिल्ली बन जाने से दम घुटने लगता है।
  • पहचान परीक्षण: शिक टेस्ट (Schick Test)।
  • बचाव: DPT टीका।
6. टी.बी. / क्षय रोग (Tuberculosis)

जीवाणु: Mycobacterium tuberculosis

खोजकर्ता: रॉबर्ट कोच (Robert Koch)

संक्रमित अंग: मुख्यतः फेफड़े (Lungs)

  • पहचान परीक्षण: मोंटू टेस्ट (Mantoux Test)।
  • रोकथाम टीका: BCG (Bacillus Calmette-Guérin)।
  • उपचार पद्धति: DOTS (Directly Observed Treatment, Short-course)।
7. प्लेग (Plague)

जीवाणु: Yersinia pestis (या Pasteurella pestis)

खोजकर्ता: अलेक्जेंड्रे येर्सिन (Alexandre Yersin)

संक्रमित अंग: लसिका ग्रंथियां (Lymph Nodes), फेफड़े एवं लाल रक्त कणिकाएं

  • इसे 'काली मौत' (Black Death) कहा जाता है।
  • वाहक: चूहों के शरीर पर पाए जाने वाले पिस्सू (Xenopsylla cheopis)।
8. कुष्ठ रोग (Leprosy)

जीवाणु: Mycobacterium leprae

खोजकर्ता: गेरहार्ड हेन्सेन (Gerhard Hansen)

संक्रमित अंग: तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nerves) एवं त्वचा

  • इसे 'हेन्सेन रोग' (Hansen's Disease) भी कहा जाता है।
  • शरीर के अंगों में संवेदनशीलता (Sensation) समाप्त हो जाती है।
  • उपचार: MDT (Multi-Drug Therapy)।
02. विषाणु (Virus) जनित रोग
1. एड्स (AIDS)

विषाणु: HIV (Human Immunodeficiency Virus — यह एक Retrovirus / RNA वायरस है)

खोजकर्ता: ल्यूक मोंटाग्नियर (Luc Montagnier) एवं रॉबर्ट गैलो

संक्रमित अंग: प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System — विशेष रूप से T4 लिम्फोसाइट्स / CD4 सेल्स)

  • पूरा नाम: Acquired Immuno Deficiency Syndrome
  • प्राथमिक जाँच: ELISA Test (Enzyme-Linked Immunosorbent Assay)
  • पुष्टिकरण जाँच: Western Blot Test
  • उपचार पद्धति: ART (Antiretroviral Therapy)
2. पोलियो (Poliomyelitis)

विषाणु: Poliovirus (Enterovirus)

खोजकर्ता / टीका निर्माता:

  • जोनास साल्क (Jonas Salk): पहला इंजेक्शन वाला मृत टीका (IPV, 1952)
  • अल्बर्ट साबिन (Albert Sabin): ओरल पोलियो ड्रॉप (OPV, 1961)

संक्रमित अंग: केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) एवं रीढ़ की हड्डी की मोटर नर्व्स (मांसपेशियों में लकवा)

  • संक्रमण का माध्यम: दूषित जल एवं भोजन
3. स्वाइन फ्लू (Swine Flu)

विषाणु: Influenza A (H1N1 strain)

संक्रमित अंग: श्वसन तंत्र (Respiratory System) एवं फेफड़े

  • प्राथमिक स्रोत: सूअर (Swine)
  • प्रमुख एंटीवायरल दवा: टैमीफ्लू (Tamiflu / Oseltamivir)
  • नोट: बर्ड फ्लू का वायरस H5N1 होता है।
4. रेबीज (Rabies / हाइड्रोफोबिया)

विषाणु: Rabies virus (Rhabdovirus — बुलेट के आकार का)

खोजकर्ता (टीका): लुई पाश्चर (Louis Pasteur, 1885)

संक्रमित अंग: केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क एवं रीढ़ की हड्डी)

  • वाहक: पागल कुत्ते, बिल्ली या चमगादड़ के काटने से।
  • प्रमुख लक्षण: हाइड्रोफोबिया (Hydrophobia) यानी पानी से अत्यधिक भय लगना।
5. डेंगू ज्वर (Dengue Fever)

विषाणु: Flavivirus (Arbovirus समूह)

वाहक (Vector): एडीज इजिप्टी (Aedes aegypti — दिन में काटने वाला मच्छर)

संक्रमित अंग: रक्त (प्लेटलेट्स), पेशियाँ एवं जोड़

  • इसे 'हड्डी तोड़ बुखार' (Breakbone Fever) भी कहा जाता है।
  • रक्त में प्लेटलेट्स (Thrombocytes) की संख्या में तीव्र गिरावट आती है।
6. चेचक (Smallpox / बड़ी माता)

विषाणु: Variola virus

खोजकर्ता (टीका): एडवर्ड जेनर (Edward Jenner, 1796 — विश्व का पहला टीका)

संक्रमित अंग: संपूर्ण शरीर (विशेष रूप से त्वचा एवं श्लेष्मा झिल्ली)

  • WHO द्वारा 1980 में इसे विश्व से पूर्णतः उन्मूलित (Eradicated) घोषित किया जा चुका है।
  • नोट: छोटी माता (Chickenpox) का वायरस Varicella zoster होता है।
7. हेपेटाइटिस (Hepatitis / पीलिया रोग)

विषाणु: Hepatitis Virus (Hepatitis A, B, C, D, E)

खोजकर्ता: बारूक ब्लमबर्ग (Baruch Blumberg — Hepatitis B की खोज)

संक्रमित अंग: यकृत (Liver / लिवर)

  • Hepatitis B एक DNA वायरस है (अन्य अधिकांश RNA होते हैं) और यह रक्त/शारीरिक द्रव से फैलता है।
  • Hepatitis A और E दूषित जल व भोजन से फैलते हैं।
  • लिवर में सूजन, बिलीरुबिन का बढ़ना और त्वचा/आँखों का पीला होना मुख्य लक्षण हैं।
03. प्रोटोजोआ (Protozoa) जनित रोग
Trick: "पापा काम पे सोते हैं"
  • पा - पायरिया
  • का - कालाजार
  • म - मलेरिया
  • पे - पेचिश
  • सोते हैं - सोने की बीमारी (Sleeping Sickness)
1. मलेरिया (Malaria)

परजीवी (प्रोटोजोआ): Plasmodium (विशेषतः P. vivax, P. falciparum — सबसे घातक)

वाहक (Vector): मादा एनाफिलीज़ मच्छर (Female Anopheles)

खोजकर्ता:

  • चार्ल्स लावेरन (Charles Laveran): रक्त में मलेरिया परजीवी की खोज की।
  • रोनाल्ड रॉस (Ronald Ross): मच्छर द्वारा मलेरिया फैलने की पुष्टि की (नोबेल पुरस्कार विजेता)।

संक्रमित अंग: लाल रक्त कणिकाएं (RBC) एवं प्लीहा (Spleen / तिल्ली)

  • कपकपी के साथ तेज बुखार आता है, जो परजीवी द्वारा स्रावित 'हीमोज़ोइन' (Haemozoin) विषैले पदार्थ के कारण होता है।
  • पारंपरिक औषधि: सिनकोना के पेड़ की छाल से प्राप्त कुनैन (Quinine)।
2. पेचिश / अमीबियासिस (Amoebiasis / Amoebic Dysentery)

परजीवी (प्रोटोजोआ): Entamoeba histolytica

वाहक / माध्यम: दूषित जल, संदूषित भोजन एवं घरेलू मक्खियाँ

संक्रमित अंग: बड़ी आँत (Large Intestine)

  • आँत की दीवारों में घाव हो जाते हैं, जिससे पेट में ऐंठन के साथ मल में श्लेष्मा (Mucus) और रक्त आता है।
3. पायरिया (Pyorrhea)

परजीवी (प्रोटोजोआ): Entamoeba gingivalis

संक्रमित अंग: मसूड़े (Gums) एवं दाँत

  • मसूड़ों से खून और मवाद (Pus) आना तथा मुँह से तीव्र दुर्गंध निकलना।
  • नोट: यह विटामिन C की कमी से भी गंभीर हो जाता है।
4. कालाजार (Kala-azar / दमदम बुखार / Visceral Leishmaniasis)

परजीवी (प्रोटोजोआ): Leishmania donovani

वाहक (Vector): बालू मक्खी / सैंडफ्लाई (Phlebotomus / Sandfly)

संक्रमित अंग: अस्थि मज्जा (Bone Marrow), यकृत (Liver) एवं प्लीहा (Spleen)

  • रुक-रुक कर तेज बुखार, प्लीहा और लिवर का बढ़ना तथा त्वचा का रंग काला पड़ना।
  • भारत में यह मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश में देखा जाता है।
5. सोने की बीमारी (Sleeping Sickness / African Trypanosomiasis)

परजीवी (प्रोटोजोआ): Trypanosoma brucei

वाहक (Vector): सीसी मक्खी (Tse-tse fly / Glossina)

संक्रमित अंग: केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) एवं मस्तिष्क

  • रोगी को अत्यधिक नींद, मानसिक भ्रम और तेज बुखार आता है।
  • समय पर उपचार न मिलने पर रोगी कोमा में चला जाता है।
04. कवक (Fungus) जनित रोग
Trick: "गंजा दामाद खाए फ्रूट"
  • गंजा - गंजापन (Baldness / Tinea capitis)
  • दामा - दमा (Asthma / Aspergillus fumigatus)
  • द - दाद (Ringworm / Trichophyton)
  • खाए - खाज (Scabies)
  • फ्रूट - एथलीट फुट (Athlete's foot / Tinea pedis)
1. दाद (Ringworm)

कवक (Fungus): Microsporum, Trichophyton या Epidermophyton

संक्रमित अंग: त्वचा (Skin), नाखून एवं सिर की त्वचा (Scalp)

  • त्वचा पर लाल रंग के गोल चकत्ते (Rings) बन जाते हैं, जिनमें तीव्र खुजली और जलन होती है।
  • यह संक्रमित व्यक्ति के तौलिए, कपड़े या सीधे स्पर्श से तेजी से फैलता है।
2. खाज / खुजली (Scabies)

कारक जीव: Acarus scabies (यह सूक्ष्म घुन / Mite द्वारा होता है, परंतु इसे कवक/त्वचा विकारों के साथ पढ़ा जाता है)

संक्रमित अंग: त्वचा (विशेष रूप से उंगलियों के बीच की खाली जगह, कलाई और कमर)

  • त्वचा में बारीक रेखाएं या चकत्ते बनते हैं और रात के समय अत्यधिक तीव्र खुजली होती है।
3. दमा / अस्थमा (Asthma)

कवक (Fungus): Aspergillus fumigatus

संक्रमित अंग: फेफड़े (Lungs) एवं श्वसन नली (Bronchial tubes)

  • इस कवक के बारीक बीजाणु (Spores) सांस के माध्यम से फेफड़ों में पहुंचकर कफ और सूजन पैदा करते हैं, जिससे सांस फूलने लगती है और सांस लेने में सीटी जैसी आवाज आती है।
4. एथलीट फुट (Athlete's Foot)

कवक (Fungus): Tinea pedis

संक्रमित अंग: पैरों की त्वचा (विशेषकर पैर की उंगलियों के बीच का भाग)

  • पैरों में लगातार नमी और गीले जूते-मोजे पहनने से यह कवक पनपता है।
  • पैरों की उंगलियों के बीच की त्वचा कटने-फटने लगती है, सफेद पड़ जाती है और दर्दभरी खुजली होती है।
रोगवाहक कीट एवं उनके द्वारा प्रसारित रोग
1. मादा एनाफिलीज़ मच्छर (Female Anopheles Mosquito)

प्रसारित रोग: मलेरिया (Malaria)

रोगजनक (Pathogen): Plasmodium परजीवी (प्रोटोजोआ)

  • केवल मादा मच्छर ही रक्त चूसती है (अंडों के पोषण के लिए), नर मच्छर फूलों का रस पीता है।
  • यह मुख्यतः गंदे/ठहरे हुए साफ पानी दोनों में पनप सकती है और रात व शाम के समय अधिक सक्रिय होती है।
2. एडीज इजिप्टी मच्छर (Aedes aegypti Mosquito)

प्रसारित रोग:

  • 1. डेंगू ज्वर (Dengue Fever) — Flavivirus
  • 2. चिकनगुनिया (Chikungunya) — Chikungunya virus
  • 3. पीत ज्वर (Yellow Fever) — Flavivirus
  • 4. जीका वायरस (Zika Virus) — Zika virus

मुख्य पहचान व तथ्य:

  • इसके शरीर और पैरों पर सफेद और काली धारियाँ होती हैं, इसलिए इसे 'टाइगर मच्छर' (Tiger Mosquito) भी कहते हैं।
  • यह साफ व ठहरे हुए पानी (कूलर, गमले, टायरों) में पनपता है।
  • यह मुख्य रूप से दिन के समय (Day biter) काटता है।
3. क्यूलेक्स मच्छर (Culex Mosquito)

प्रसारित रोग:

  • 1. फाइलेरिया / हाथीपांव (Filariasis / Elephantiasis) — कारक: Wuchereria bancrofti (कृमि/Nematode)
  • 2. जापानी एन्सेफलाइटिस (Japanese Encephalitis - JE) — कारक: Flavivirus (मस्तिष्क शोथ)
  • यह अत्यधिक गंदे, नाली और रुके हुए पानी में अंडे देता है।
  • जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस का प्राकृतिक भंडार (Reservoir) सूअर और जलीय पक्षी होते हैं, जहाँ से क्यूलेक्स मच्छर इसे मनुष्यों में फैलाता है।
4. बालू मक्खी / सैंडफ्लाई (Sandfly / Phlebotomus)

प्रसारित रोग: कालाजार (Kala-azar / दमदम बुखार / Visceral Leishmaniasis)

रोगजनक (Pathogen): Leishmania donovani (प्रोटोजोआ)

  • यह सामान्य घरेलू मक्खी से आकार में बहुत छोटी (लगभग एक-चौथाई) और रोएँदार होती है।
  • यह नमी वाली जगहों, कच्ची मिट्टी की दीवारों और अंधेरी दरारों में पनपती है।
5. सीसी मक्खी (Tse-tse Fly / Glossina)

प्रसारित रोग: सोने की बीमारी (Sleeping Sickness / African Trypanosomiasis)

रोगजनक (Pathogen): Trypanosoma brucei (प्रोटोजोआ)

  • यह मुख्य रूप से अफ्रीकी महाद्वीप के ग्रामीण और सवाना क्षेत्रों में पाई जाती है।
  • यह दिन के समय काटती है और इसके काटने से परजीवी सीधे रक्त प्रवाह में प्रवेश कर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है।
प्रमुख टीके एवं प्रतिरक्षण
1. BCG टीका (Bacillus Calmette-Guérin)

रोग से बचाव: टी.बी. / क्षय रोग (Tuberculosis)

खोजकर्ता: अल्बर्ट कैलमेट (Albert Calmette) एवं केमिली गुएरिन (Camille Guérin)

टीके की प्रकृति: जीवित क्षीण जीवाणु टीका (Live Attenuated Bacterial Vaccine)

देने का समय व मार्ग: जन्म के तुरंत बाद (या 1 वर्ष के भीतर) | मार्ग: अंतःत्वचीय (Intradermal — बाएँ ऊपरी हाथ पर)

  • यह केवल बैक्टीरिया-रोधी टीका है जो टीबी के गंभीर रूपों (जैसे टीबी मैनिंजाइटिस) से बच्चों की रक्षा करता है।
2. DPT टीका (Triple Antigen Vaccine)

रोग से बचाव (तीन रोग):

  • 1. D → डिप्थीरिया (Diphtheria / गलघोंटू)
  • 2. P → पर्टुसिस (Pertussis / काली खाँसी / Whooping Cough)
  • 3. T → टिटनेस (Tetanus / लॉकजॉ)

टीके की प्रकृति: टॉक्सॉइड एवं निष्क्रिय जीवाणु (Toxoid + Inactivated Bacteria)

देने का मार्ग: अंतःपेशीय (Intramuscular - IM)

  • इसे शिशु को 6, 10 और 14 सप्ताह की आयु में प्राथमिक खुराकों के रूप में दिया जाता है।
3. MMR टीका

रोग से बचाव (तीन रोग):

  • 1. M - मीजल्स (Measles / खसरा)
  • 2. M - मम्प्स (Mumps / गलसुआ)
  • 3. R → रूबेला (Rubella / जर्मन खसरा)

टीके की प्रकृति: जीवित क्षीण विषाणु टीका (Live Attenuated Viral Vaccine)

खोजकर्ता: मौरिस हिलमैन (Maurice Hilleman)

देने का मार्ग: सबक्यूटेनियस (Subcutaneous - SC / त्वचा के नीचे)

  • यह सामान्यतः 9 से 12 महीने और 15 से 18 महीने की उम्र में दिया जाता है।
विटामिन एवं पोषण

विटामिन को रक्षात्मक पदार्थ भी कहा जाता हैं। विटामिन, एक प्रकार का कार्बनिक यौगिक हैं, इनसे कोई कैलोरी प्राप्त नहीं होती। इनसे शरीर को किसी भी प्रकार की ऊर्जा प्राप्त नहीं होती हैं। शरीर कोशिकाओं में इनका संश्लेषण नहीं होता हैं।

विटामिन की खोज 1911 ई. में F.G. हाफकिन्स ने की थी परन्तु विटामिन नाम फंक नामक विज्ञानिक ने दिया था।

विटामिन दो प्रकार के होते हैं :-

  • 1. जल में घुलनशील - B, C
  • 2. वसा में घुलनशील - A, D, E, K
विटामिन के खोजकर्ता
  • A - वैकुलर 1911
  • B - वैकुलर 1911
  • B1 - कैसिमिर फंक 1912
  • B2 - डी.टी. स्मिथ और ई.जी. हेंड्रिक 1926
  • B3 - काॅनरैड एलवेजम 1937
  • B9 - लुसी विल्स 1933
  • B6 - पाॅल जियोर्जी 1934
  • C - ए. होइस्ट और टी. फ्रेलिच 1912
  • D - एडवर्ड मेलानबी 1922
  • E - हर्बर्ट इवांस और कैथरीन बिशप 1922
विटामिन के रासायनिक नाम
  • A: रेटिनॉल
  • B1: थायमिन
  • B2: राइबोफ्लेविन
  • B3: निकोटिनैमाइड या नियासिन
  • B5: पैंटोथेनिक अम्ल
  • B6: पाईरीडाक्सिन
  • B7: बायोटिन
  • B9: Folic Acid (फॉलिक अम्ल)
  • B12: सायनोकोबालमिन
  • C: एस्कार्बिक एसिड
  • D: कैल्सिफेरॉल
  • E: टोकोफेरॉल
  • K: फिलोक्विंनोन
विटामिन की कमी से होने वाले रोग एवं पूर्ति के स्रोत :

Vitamin A : रतौधी ,जीरोप्‍थैलमिया, संक्रमणों का खतरा, त्वचा शुष्क, त्वचा और झिल्लियों में परिवर्तन का आना, दोषपूर्ण दांत आदि।

पूर्ति के स्रोत : हरी सब्जियां, दूध, टमाटर, पनीर, गाजर, चुकंदर, पीले रंग के फल अंडा, मछलीयकृत तेल

Vitamin B1 : बेरी बेरी, वृद्धि का रुकना, भूख और वजन का घटना, तंत्रिका विकास, थकान का होना, बदहजमी, पेट की खराबी आदि।

पूर्ति के स्रोत : गेहूँ, संतरे, हरे मटर, खमीर, अंडे, चावल, मूँगफली, हरी सब्जियाँ, अंकुर वाले बीज आदि हैं।

Vitamin B2 : त्वचा का फटना, आँखों का लाल होना, वृद्धि का रुकना, धुधली दृष्टि का होना, जीभ पर छाले का पड़ जाना ,असमय बुढ़ापा आना, प्रकाश ना सह पाना आदि।

पूर्ति के स्रोत : खमीर, कलेजी, मांस, हरी सब्जियां दूध आदि हैं।

Vitamin B3 : जीभ का चिकनापान, त्वचा पर फोड़े फुंसी होना, त्‍वचा पर दाद होना, पाचन क्रिया में गड़बड़ी, मानसिक विकारों का होना, आदि।

पूर्ति के स्रोत : मांस, मुंगफली, आलू, टमाटर, सब्जियां आदि हैं।

Vitamin B5 : बाल सफेद होना, पेशियो में लकवा, पैरो में जलन (बर्निंग फीट), आदि।

पूर्ति के स्रोत : मांस, दूध, मुंगफली, गन्ना, टमाटर आदि हैं।

Vitamin B6 : एनिमिया, त्वचा रोग, मस्तिष्क का ठीक से काम ना करना, शरीर का भार कम होना आदि।

पूर्ति के स्रोत : गाजर, मांस, अनाज आदि हैं।

Vitamin B7 : लकवा, शरीर में दर्द, बालों का गिरना तथा वृद्धि में कमी आदि।

पूर्ति के स्रोत : अनाज, चॉकलेट, अंडे की जर्दी, दही, ओटमील, केला, सेब, बीन्स, ब्रोकली और पनीर आदि।

Vitamin B9 (फॉलिक अम्ल) : एनीमिया, पेचिस रोग आदि।

पूर्ति के स्रोत : दाल, यकृत, सब्जियां, अंडा, सेम आदि हैं।

Vitamin B12 : रक्तअल्पता (रुधिर की कमी), एनिमिया, पांडुरोग।

पूर्ति के स्रोत : मांस, कलेजी, दूध, अंडे आदि हैं।

Vitamin C : स्कर्वी रोग, मसूड़े फूलना, अस्थियों के चारो ओर श्राव, अस्थियां कमजोर होना आदि।

पूर्ति के स्रोत : खट्टे रसीले फल जैसे सन्तरा, नींबू, नारंगी, आँवला, अँगूर, सेब आदि

Vitamin D : रिकेट्स (सूखा रोग), ऑस्टियोमलेशिया, कमजोर दांत, दातों का सड़ना आदि।

पूर्ति के स्रोत : खुली त्वचा पर सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणें पड़ती हैं तो शरीर की विटामिन D की पूर्ति हो जाती है।

Vitamin E : जनन शक्ति का कम होना।

पूर्ति के स्रोत : हरी पत्तेदार सब्जियों, बादाम, कीवी फल, मक्खन, अंकुरित गेंहूँ, वनस्पति तेल, अंडो में, दूध में, अखरोट, सरसों आदि

Vitamin K : रक्‍त का थक्‍का न जमना, ऐंठन आदि।

पूर्ति के स्रोत : टमाटर, हरी सब्जियां, आदि हैं।

संघ ( भाग - 05 )

संघ 
{ भाग - 05, 52-151 }

राष्ट्रपति 

राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक होता है। राष्ट्रपति देश का औपचारिक प्रमुख पद ब्रिटेन से लिया गया है।

अनुच्छेद 52 : भारत का एक राष्ट्रपति होगा।

अनुच्छेद 53 : संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी जिसका प्रयोग वह प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार करेगा।

अनुच्छेद 54 : राष्ट्रपति का निर्वाचन : इसका निर्वाचन एकल संक्रमणीय अनुपातिक पद्धति द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से कराया जाता है।

अनुच्छेद 55 : कोटा : इसमें जमानत जब्त होने के बाद भी प्रत्याशी जीत सकता है किन्तु कोटा से काम वोट पाने पर भी जीते हुए प्रत्याशी को भी हटा दिया जाता है।

अनुच्छेद 56 : राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्षो का होता है।

अनुच्छेद 57 : दुबारा निर्वाचन  :  एक व्यक्ति दुबारा राष्ट्रपति के लिये निर्वाचित हो सकता है।

अनुच्छेद 58 : योग्यता :  1. भारत का नागरिक होना चाहिए , 2. 35 वर्ष आयु होनी चाहिए , 3. लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यता होनी चाहिए , 4. 50 प्रस्तावक तथा 50 अनुंडक होनी चाहिए।

अनुच्छेद 59 : दशाएं / शर्तें : 1. पागल या दिवालिया न हो , 2. लाभ के पद पर न हो , 3. संसद या विधानमंडल में सदस्य न हो।

अनुच्छेद 60 : राष्ट्रपति को शपथ सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य /वरिष्ठतम न्यायाधीश दिलाते हैं।

अनुच्छेद 61 : महाभियोग : यह U S A के संविधान से लिया गया है। राष्ट्रपति पर महाभियोग दोनों सदनों यानि उच्च सदन या निम्न सदन कोई भी शुरू कर सकता है जिस सदन से महाभियोग शुरू होगा उस सदन का 25% सदस्य अनुमोदित करेंगे। उसके बाद वह सदन 2 / 3 बहुमत से महाभियोग पारित करेगा। उसके बाद वह दूसरे सदन को भेजने से 14 दिन पूर्व राष्ट्रपति को सुचना दी जाएगी ।उसके बाद दूसरे सदन में भी यदि 2 / 3 बहुमत से पारित हो जायेगा तब राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाया जायेगा ।

अनुच्छेद 62 : राष्ट्रपति के रिक्त पद को भरने के लिए राष्ट्रपति का निर्वाचन पदवधि की समाप्ति से पहले ही कर लिया जायेगा।

उपराष्ट्रपति 

अनुच्छेद 63 - भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।

अनुच्छेद 64 : यह राज्यसभा के पदेन सभापति भी होगें।
 
अनुच्छेद 65 : राष्ट्रपति पद खाली होनें पर उपराष्ट्रपति कार्यवाहन राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेंगें इसलिये इनकों वेतन व भत्ते राष्ट्रपति वालें मिलेगें।
नोट: वोट नही डालेंगें लेकिन निर्णायण वोट डाल सकते है।

अनुच्छेद 66 : नियुक्ति
  • चुनाव :  गुप्त, अप्रत्यक्ष, एकल संक्रमणीय व समानुपातिक प्रतिनिधित्व के अुनसार
  • योग्यता :  भारत के नागरिक हो, 35 वर्ष आयु, राज्य सभा के सदस्य चुने जाने की योग्यता
अनुच्छेद 67 : कार्यकाल -
  • 5 वर्ष
  • त्यागपत्र :  राष्ट्रपति को देंगें।
  • पद से हटाना - राज्य सभा में प्रस्ताव लाया जायेगा। 50 प्रतिशत से अधिक पर प्रस्ताव पारित होना चाहिए और लोक सभा की केवल अनुमति चाहिए।
अनुच्छेद 69 : शपथ : राष्ट्रपति या उनके द्वारा नियुक्त कोई व्यक्ति इनको शपथ दिलाएगा।

प्रधानमंत्री एवं मत्रीपरिषद् 

अनुच्छेद 74 :राष्ट्रपति जी प्रधानमत्री व उसकी मंत्रीपरिषद् की सलाह पर काम करेंगें।

अनुच्छेद 75 : राष्ट्रपति प्रधानमत्री व उसकी मंत्रीपरिषद् की नियुक्ति करेंगें। 

नोट: मत्रीपरिषद् लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। लेकिन व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति के प्रति उत्तरदायी है।
कौन बनेगा प्रधानमंत्री - 
  • लोक सभा या राज्य सभा का सदस्य
  • सदस्य न होनें पर 6 महीनें में उसे दोनेां सदनों में से किसी में सदस्यता ग्रहण करनी होगी। साथ ही साथ लोक सभा में बहुमत भी हासिल करना होगा।
संसद 

भारत सरकार की संसदीय प्रणाली ब्रिटिश संविधान से अभिप्रेरित है। 
ससंद के 03 अंग हैं - राष्ट्रपति, राज्यसभा, लोकसभा। संसद के  02 सदन है : राज्यसभा, लोकसभा

अनुच्छेद 80 : राज्यसभा
  • अन्य नाम - राज्‍यों की परिषद / उच्च सदन / स्‍थायी सदन
 राज्यसभा सदस्य संख्या :
  • अधिकतम सदस्य - 250 {12 मनोनीत + 238 निर्वाचित }
  • वर्तमान सदस्य - 245 {12 मनोनीत + 233 निर्वाचित (225 State + 08 UT ) }
08 UT = Delhi 03 +  Pondicherry 01 + J&K 04

राज्य सभा की शक्तियां :
  • उपराष्ट्रपति को हटानें का पहला प्रस्ताव राज्य सभा में ही लाया जायेगा।
  • Ar.312 - अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के सृजन की शक्ति ( विशेष बहुमत से)
  • Ar.249 - राज्य सूची के विषय में परिवर्तन का अधिकार है।
अनुच्छेद 81 : लोकसभा
  • अन्य नाम - लोगों का सदन / निम्न सदन / प्रथम सदन / लोकप्रिय सदन / प्रतिनिधि सभा
  • लोकसभा में (अनुच्छेद 331 ) और राज्य विधानसभा में (अनुच्छेद 333) के लिए एंग्लो इंडियन आरक्षित सीटों को जनवरी 2020 में 104वें संविधान संशोधन अधिनियम 2019 द्वारा समाप्त कर दिया गया।
लोकसभा सदस्य संख्या :
  • अधिकतम सदस्य - 550 { 550 निर्वाचित (530 State + 20 UT ) }
  • वर्तमान सदस्य - 543 { 543 निर्वाचित (524 State + 19 UT ) }
19 UT = Delhi 07 +  Other UT 12

लोक सभा की शक्तियां :
  • Ar. 110 मनी बिल लोकसभा में ही लाया जायेगा। राज्य सभा केवल 14 दिन तक उसे रोक कर सुझाव दे सकती है पर बाध्य नही कर सकती।
  • Ar. 108 स्ंयुक्त सत्र को राष्ट्रपति बुलाएगा। सुयक्त सत्र की अध्यक्षता लोकसभा का स्पीकर करेगा।
अनुच्छेद 83 :सदनों की अवधि 
  • राज्य सभा - सदस्य कार्यकाल : 06 वर्ष तक ( जिनमे 1/3 सदस्य हर 02 साल में सेवा-निवृत होते हैं। ){ इसे भंग नहीं किया जा सकता। }
  • लोक सभा : 5 वर्ष या प्रधानमंत्री की सलाह पर समय से पहले राष्ट्रपति इसे भंग / विघटितकर कर सकता है।
अनुच्छेद 84 : सदन योग्यता 
  • भारत का नागरिक हो !
  • लोक सभा का सदस्य 25 वर्ष, 
  • राज्यसभा के लिए 30 वर्ष होनी चाहिए।
  • संसद द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार अन्य योग्यताएँ।
अनुच्छेद 85 : संसद‌ के सत्र, सत्रावसान और विघटन
  • राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को बुलाता है।
  • दो सत्रों के बीच 6 महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए।
  • राष्ट्रपति सदन/सदनों का सत्रावसान (Prorogation) कर सकता है।
  • राष्ट्रपति लोकसभा को भंग कर सकता है।
Exam Point :
  • सत्र - मानसून सत्र जुलाई से सितम्बर, शीतकालीन सत्र नवम्बर से, बजट सत्र :फरवरी से अप्रैल/मई
  • सत्रावसान  - सत्र की समाप्ति इसकी घोषणा राष्ट्रपति करता है।
  • लोकसभा एवं राज्यसभा में मतभेद होने पर संयुक्त बैठक होती है। अब तक 3 बार संयुक्त सत्र हुआ। 1961 दहेज प्रथा पर, 1978 बैकिग सुधार पर, पोटा का बिल टेरीरिसम रोकने के लिए।
  • भारतीय संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक साधारण विधेयक, सामान्य बहुमत से सम्बन्धित है।
  • संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभाध्यक्ष करता है ।
  • संसद के संयुक्त बैठक को राष्ट्रपति सम्बोधित करता है। 
  • अस्थायी ससंद भारत में 17 अप्रैल, 1952 तक अस्तित्व में रही।
  • भारतीय संसद की सम्प्रभुता प्रतिबंधित है - न्यायिक समीक्षा से
  • लोक सभा के पहले अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलेंकर थे।
  • लोकसभा का प्रथम सत्र 13 मई 1952 को आरंभ हुआ था।

राजपूत काल

राजपूत काल

शुरुआत (647 ईस्वी ): सम्राट हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद उत्तर भारत का कोई एक केंद्रीय सम्राट नहीं रहा। पूरा साम्राज्य छोटे-छोटे स्वतंत्र राज्यों में बंट गया, जिन पर विभिन्न राजपूत राजवंशों ने अधिकार कर लिया। इस काल में भारत के अलग-अलग हिस्सों में कई शक्तिशाली राजपूत वंश उभरे। 

अंत (1192 ईस्वी): तराइन के द्वितीय युद्ध में मोहम्मद गोरी द्वारा पृथ्वीराज चौहान की पराजय और बाद में 1206 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत की स्थापना के साथ ही मुख्य राजपूत काल समाप्त माना जाता है।

मूल जानकारी
  • लगभग 7वीं से 12वीं शताब्दी तक माना जाता है।
  • राजपूतों का प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र — उत्तर एवं पश्चिम भारत।
  • राजपूत शब्द का संबंध 'राजपुत्र' शब्द से माना जाता है।
  • इस काल में भारत में अनेक क्षेत्रीय राजवंशों का उदय हुआ।
  • राजपूत काल में सामंतवादी व्यवस्था का काफी विकास हुआ।
प्रमुख राजपूत राजवंश

प्रमुख राजवंश - क्षेत्र एवं शासक
क्र.सं. वंश (Dynasty) प्रमुख क्षेत्र (Region) प्रमुख शासक (Key Ruler)
1 गुर्जर-प्रतिहार वंश कन्नौज / राजस्थान मिहिर भोज
2 चौहान वंश अजमेर / दिल्ली पृथ्वीराज चौहान
3 गहड़वाल वंश कन्नौज जयचंद्र
4 चंदेल वंश बुंदेलखंड धंग / विद्याधर
5 परमार वंश मालवा राजा भोज
6 सोलंकी वंश गुजरात सिद्धराज जयसिंह
7 तोमर वंश दिल्ली अनंगपाल
8 सिसोदिया वंश मेवाड़ बप्पा रावल / हम्मीर
गुर्जर-प्रतिहार वंश :
  • संस्थापक — नागभट्ट प्रथम
  • राजधानी — कन्नौज
  • सबसे प्रसिद्ध शासक — मिहिर भोज
  • मिहिर भोज की उपाधियाँ — 'आदिवराह' और 'प्रभास'
  • अरब यात्रियों ने प्रतिहार शासकों की शक्ति का उल्लेख किया।
  • त्रिपक्षीय संघर्ष किसके लिए था? → कन्नौज
  • कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष में प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट शामिल थे।
चौहान वंश :
  • राजधानी : अजमेर और दिल्ली
  • सबसे प्रसिद्ध शासक — पृथ्वीराज चौहान { पिता सोमेश्वर }
  • पृथ्वीराज चौहान को राय पिथौरा भी कहा जाता है।
  • पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गौरी के बीच दो प्रसिद्ध युद्ध हुए।
    • प्रथम तराइन का युद्ध — 1191 , पृथ्वीराज चौहान की विजय हुई
    • द्वितीय तराइन का युद्ध — 1192 , मुहम्मद गौरी  की विजय हुई।
  • 1192 का तराइन युद्ध उत्तर भारत के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है।
चंदेल वंश :
  • प्रमुख क्षेत्र — बुंदेलखंड
  • प्रसिद्ध मंदिर — खजुराहो के मंदिर
  • खजुराहो वर्तमान में मध्य प्रदेश में है।
  • चंदेल शासकों ने खजुराहो में अनेक मंदिरों का निर्माण कराया।
  • प्रमुख शासक — धंग और विद्याधर।
परमार वंश
  • प्रमुख क्षेत्र — मालवा
  • राजधानी — धारा नगरी
  • सबसे प्रसिद्ध शासक — राजा भोज
  • राजा भोज कला, साहित्य और शिक्षा के संरक्षक थे।
  • भोजपुर का भोजेश्वर मंदिर राजा भोज से संबंधित है।
गुजरात के चालुक्य (सोलंकी वंश):
  • इनकी राजधानी अन्हिलवाड़ा (अन्हिलपाटन / पाटन) थी।
  • प्रमुख शासक — सिद्धराज जयसिंह
  • कुमारपाल भी वंश का प्रसिद्ध शासक था।
गहड़वाल वंश
  • मुख्य राजधानी - वाराणसी ( बनारस ) थी, लेकिन उन्होंने कन्नौज (कान्यकुब्ज) को भी राजधानी बनाया था
  • प्रमुख शासक — गोविंदचंद्र
  • जयचंद्र गहड़वाल वंश का प्रसिद्ध शासक था।
राजपूत काल की साहित्यिक कृतियाँ - रचयिता
  • पृथ्वीराज रासो — चंदबरदाई
  • राजतरंगिणी — कल्हण
  • समरांगण सूत्रधार — राजा भोज
  • गीत गोविंद — जयदेव
  • संस्कृत नाटक 'हरिकेलि' की रचना -विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव)
कला एवं स्थापत्य
  • इस काल में मंदिर स्थापत्य का व्यापक विकास हुआ।
  • उत्तर भारत में नागर शैली का विकास हुआ।
  • खजुराहो के मंदिर — चंदेल
  • मोढेरा सूर्य मंदिर — सोलंकी भीमदेव प्रथम
  • भोजेश्वर मंदिर — राजा भोज
  • दिलवाड़ा मंदिर — जैन स्थापत्य, राजस्थान
  • दिल्ली नगर (ढिल्लिका) की स्थापना - अनंगपाल तोमर
प्रमुख राजवंश - क्षेत्र एवं शासक

एक जिला एक उत्पाद (UP)

One District One Product

  • शुरूवात - 24 जनवरी 2018 उत्तर प्रदेश में
  • उद्देश्य → स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा
  • Focus → कारीगर + स्थानीय उद्योग + रोजगार
  • Target → Local to Global
  • UP ODOP → 75 जिले, प्रत्येक जिले की विशिष्ट उत्पाद पहचान
  • ब्रांड एम्बेसडर - कंगना रनौत {1 अक्टूबर 2021 से घोषित }
  • उत्तर प्रदेश का ODOP मॉडल बाद में भारत सरकार के स्तर पर भी अपनाया गया और One District One Product (ODOP) Programme को देशभर में बढ़ावा दिया गया।
    • अलीगढ़ — ताले एवं हार्डवेयर
    • अम्बेडकर नगर — वस्त्र उत्पाद
    • अयोध्या — गुड़
    • आजमगढ़ — ब्लैक पॉटरी
    • बदायूं — ज़री-ज़रदोज़ी
    • बागपत — होम फर्निशिंग
    • बलिया — बिंदी
    • बलरामपुर — दाल
    • बांदा — शजर पत्थर शिल्प
    • भदोही — कालीन
    • बिजनौर — काष्ठ कला
    • बुलंदशहर — सिरेमिक उत्पाद
    • चंदौली — काला चावल
    • चित्रकूट — लकड़ी के खिलौने
    • फतेहपुर — बेडशीट
    • फिरोजाबाद — काँच उत्पाद
    • गाजीपुर — जूट वॉल हैंगिंग
    • गोंडा — दाल
    • गोरखपुर — टेराकोटा
    • हापुड़ — होम फर्निशिंग
    • हरदोई — हैंडलूम
    • हाथरस — हींग
    • जालौन — हस्तनिर्मित कागज
    • जौनपुर — ऊनी कालीन
    • झाँसी — सॉफ्ट टॉयज
    • कन्नौज — इत्र
    • कानपुर देहात — एल्युमिनियम बर्तन
    • कानपुर नगर — चमड़ा उत्पाद
    • कासगंज — ज़री-ज़रदोज़ी
    • लखीमपुर खीरी — जनजातीय शिल्प
    • महाराजगंज — फर्नीचर
    • महोबा — गौरा पत्थर
    • मैनपुरी — तारकशी कला
    • मेरठ — खेल सामग्री
    • मुरादाबाद — धातु शिल्प
    • मुजफ्फरनगर — गुड़
    • पीलीभीत — बाँसुरी
    • प्रतापगढ़ — आँवला
    • रायबरेली — काष्ठ कला
    • सोनभद्र — कालीन
    • सीतापुर — दरी
    • सिद्धार्थनगर — काला नमक चावल
    • शाहजहाँपुर — ज़री-ज़रदोज़ी
    • शामली — लौहकला
    • श्रावस्ती — जनजातीय शिल्प
    • संभल — हॉर्न-बोन हस्तशिल्प
    • सुल्तानपुर — मूँज उत्पाद
    • उन्नाव — ज़री-ज़रदोज़ी
    • वाराणसी — बनारसी रेशम साड़ी

शैव धर्म से संबंधित

शैव धर्म

भगवान शिव की उपासना करने वाले को शैव कहते है, शिव से संबंधित धर्म को शैवधर्म कहते है।
  • शिवलिंग-उपासना का प्रारभिक पुरातात्विक साक्ष्य हड़प्पा संस्कृति के अवशेषों में मिला है।
  • वामन पुराण में शिवलिंग का पहला स्पष्ट वर्णन मत्स्यपुराण में मिलता है
  • अथर्ववेद में शिव के अन्य नाम क्या है – भव, शर्व, पशुपति, उग्र आदि।
  • ऋग्वेद में शिव  के लिए रूद्र शब्द का प्रयोग किया है।

शैव सिद्धांत में 3 प्रमुख पदार्थ/तत्व माने जाते हैं—
  1. पति (Pati) → भगवान शिव
  2. पशु (Pashu) → जीवात्मा
  3. पाश (Pasha) → बंधन
पाश के तीन प्रमुख बंधन माने जाते हैं—
  1. आणव
  2. कर्म
  3. माया
पुराण के अनुसार शैव सम्प्रदाय की संख्या 04 बताई गयी है :-
  1. पाशुपत सम्प्रदाय
  2. कापालिक सम्प्रदाय
  3. कालामुख सम्प्रदाय
  4. लिंगायत सम्प्रदाय
पाशुपत सम्प्रदाय : 
  • संस्थापक / प्रमुख आचार्य  - लकुलीश 
  • शैव धर्म का सर्वाधिक प्राचीन सम्प्रदाय - पाशुपत सम्प्रदाय
  • प्रमुख सैधान्तिक ग्रन्थ का नाम - पाशुपात सूत्र
  • श्रीकर पंडित कौन थे? - श्रीकर पंडित एक विख्यात पाशुपत आचार्य थे।
  • पाशुपत सम्प्रदाय को मानने वाले को पंचार्थिक कहा गया।
कापालिक सम्प्रदाय :
  • कापालिक सम्प्रदाय के ईष्टदेव - भैरव
  • प्रमुख केंद्र - श्री शैल नामक स्थान
कालामुख सम्प्रदाय :
  • शैव धर्म से किस सम्प्रदाय में चिता का भस्म लगता था?- कालामुख सम्प्रदाय में
  • कालामुख सम्प्रदाय में अनुयायी भोजन,जल और सुरापान किस चीज में करते है? - लोह नर-कपाल में
लिंगायत सम्प्रदाय / जंगम सम्प्रदाय / वीरशिव सम्प्रदाय :
  • प्रमुख धार्मिक ग्रंथ  - शून्य सम्प्रदाने
  • लिंगायत सम्प्रदाय दक्षिण भारत में बहुत प्रचलित था।
  • प्रमुख व्यक्तित्व → बसवन्ना
दक्षिण भारत में शैव धर्म
  • नायनारों की संख्या → 63
  • नायनारों का काल लगभग 6वीं–8वीं शताब्दी ई. माना जाता है।
  • प्रमुख नायनार संत - अप्पार, सम्बन्दर, सुंदरर, माणिक्कवाचकर
Exam Focus :
  • नायनार → शिव भक्त है। ; अलवार → विष्णु भक्त है।
  • अलवारों की परंपरा में 12 प्रमुख संत माने जाते हैं, जबकि नायनारों की संख्या 63 है।
  • गुप्तकाल में वैष्णव धर्म के साथ-साथ शैव धर्म की प्रमुखता भी रही ।
  • शिव के कितने अवतार है?- 18

पंचवर्षीय योजना

पंचवर्षीय योजना

>जोसेफ स्टालिन ने 1928 में सोवियत संघ में पहली पंचवर्षीय योजना को लागू किया। 
>भारत ने स्वतंत्रता के तुरंत बाद 1951 में अपनी पहली पंचवर्षीय योजना शुरू की। इसे योजना आयोग (1951-2014) के माध्यम से किया गया था।
  • योजना आयोग का गठन : 15 मार्च 1950
  • समाप्ति : 15 Aug 2014
  • अध्यक्ष थे : पंडित जवाहरलाल नेहरू 
  • प्रथम उपाध्यक्ष  : गुलजारी लाल नंदा
  • अंतिम उपाध्यक्ष  मोंटेक सिंह अहलूवालिया थे (26 मई 2014 को इस्तीफा दे दिया)
  • उद्देश्य एवं लाभ : नए रोजगार प्रदान करना एवं कृषि विकास, अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाना
पंचवर्षीय योजनायें केंद्रीकृत और एकीकृत राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम हैं। (1947 से 2017 तक)

प्रथम पंचवर्षीय योजना:
  • अवधि  : 01 April 1951 से  31 March 1956 तक
  • अध्यक्ष : पंडित जवाहरलाल नेहरू 
  • यह योजना हैरोड-डोमर मॉडल पर आधारित थी.
  • मुख्य ध्यान - देश के कृषि विकास पर 
  • यह योजना सफल रही और 3.6% की वृद्धि दर हासिल की थी.
  • भाखड़ा-नांगल, हीराकुंड और दामोदर घाटी जैसी बहुउद्देशीय परियोजनाओं के विकास को प्रथम योजना में महत्व मिला।
दूसरी पंचवर्षीय योजना:
  • अवधि : 01 April 1956 से  31 March 1961 तक
  • अध्यक्ष : प. जवाहरलाल नेहरू
  • यह योजना पी.सी. महालनोबिस मॉडल पर आधारित थी.
  • मुख्य लक्ष्य - देश के औद्योगिक विकास पर
  • यह योजना भी सफल रही और इसने 4.1% की वृद्धि दर हासिल की थी.
  • इस योजना के द्वारा राउरकेला, भिलाई, दुर्गापुर इस्पात केंद्र की स्थापना की गयी
तीसरी पंचवर्षीय योजना:
  • अवधि : 01 April 1961 से  31 March 1966 तक
  • PM : प. जवाहरलाल नेहरू
  • इस योजना को गाडगिल योजना भी कहा जाता है.
  • मुख्य लक्ष्य - अर्थव्यवस्था को गतिमान और आत्म निर्भर बनाना था.
  • चीन से युद्ध के कारण, यह योजना फेल हो गयी थी. इस योजना की वृद्धि दर का लक्ष्य 5.6% था लेकिन वास्तविक वृद्धि दर 2.4% रही थी.
  • इस योजना के द्वारा कृषि पर सबसे अधिक जोर दिया गया और  हरित क्रांति की शुरुवात की गयी थी
योजना अवकाश:
  • समय अवधि - 1966 से 1969 तक थी.
  • योजना अवकाश को बनाने के पीछे का कारण भारत-पाकिस्तान युद्ध और तीसरी पंचवर्षीय योजना की विफलता थी.
  • इन तीन सालों में कोई भी पंचवर्षीय योजना नहीं बनायीं गयी थी बल्कि हर साल एक वर्षीय योजना बनायीं गयी थी और हर योजना में कृषि और सम्बद्ध क्षेत्रों के साथ-साथ उद्योग क्षेत्र को समान प्राथमिकता दी गई थी.
चौथी पंचवर्षीय योजना:
  • अवधि - 01 April 1969 से  31 March 1974 तक थी.
  • अध्यक्ष : इंदिरा गांधी (PM)
  • दो मुख्य उद्देश्य थे; 
    • पहला, स्थिरता के साथ विकास और 
    • दूसरा आत्म निर्भरता की स्थिति प्राप्त करना.
  • यह योजना असफल रही थी और 5.7% की विकास दर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 3.3% की वृद्धि दर हासिल कर सकी थी.
  • इस योजना के समय श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड) 1970 कार्यक्रम की शुरुवात की गयी.
पांचवीं पंचवर्षीय योजना:
  • अवधि  : 01 April 1974 से  31 March 1978 तक (योजना 4 साल तक चली )
  • गरीबी उन्मूलन (गरीबी हटाओ) और न्याय ,कृषि उत्पादन और रक्षा में आत्मनिर्भरता पर भी ध्यान केंद्रित किया।
  • इस योजना का ड्राफ्ट ‘डी.पी. धर’ द्वारा तैयार किया गया था. 
  • कुल मिलाकर यह योजना सफल रही थी जिसने 4.4% के लक्ष्य के मुकाबले 4.8% की वृद्धि दर हासिल की थी.
रोलिंग प्लान: जब केंद्र में मोरारजी देसाई सरकार सत्ता में आयी तो उसने पांचवीं पंचवर्षीय योजना को 1978 में ही खत्म कर दिया था और इसके स्थान पर एक “वार्षिक प्लान” बना दिया था जिसे रोलिंग प्लान कहा गया था.
  • इस योजना के द्वारा गरिबी  और बेरोजगारी पर अधिक जोर दिया गया.
>जनता पार्टी द्वारा 1978 - 1980 की अवधि हेतु 'अनवरत योजना' बनायी गयी।

छठवीं पंचवर्षीय योजना:
  • अवधि अवधि  : 01 April 1980 से  31 March 1985
  • इस योजना का मूल उद्देश्य:
    •  गरीबी उन्मूलन और 
    • तकनीकी, आत्मनिर्भरता प्राप्त करना था.
  • छठी पंचवर्षीय योजना ने भारत में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत की थी. मूल्य नियंत्रण समाप्त हो गए और राशन की दुकानें बंद कर दी गईं थी जिससे खाद्य कीमतों में वृद्धि हुई थी और देश में महंगाई ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे. इस प्रकार इस योजना के समय से नेहरु के समाजवाद का अंत हो गया था.
  • यह योजना बहुत सफल हुई थी. इसका विकास लक्ष्य 5.2% था लेकिन इसने 5.7% की वृद्धि दर हासिल की थी.
सातवीं पंचवर्षीय योजना:
  • अवधि : 01 April 1985 से  31 March 1990 तक थी.
  • अध्यक्ष : राजीव गांधी
  • इस योजना के उद्देश्यों :
    • आत्म निर्भर अर्थव्यवस्था की स्थापना और 
    • रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करना शामिल था.
  • इस योजना में पहली बार निजी क्षेत्र को सार्वजनिक क्षेत्र की तुलना में अधिक में प्राथमिकता मिली थी.
  • इसका विकास लक्ष्य 5.0% था लेकिन इसने 6.0% वृद्धि दर हासिल की थी.

वार्षिक योजनाएं: केंद्र में अस्थिर राजनीतिक स्थिति के कारण आठवीं पंचवर्षीय योजना समय पर शुरू नहीं हो सकी, इस कारण 1990-91 और 1991-92 में दो वार्षिक योजनायें बनायीं गयी थीं.

आठवीं पंचवर्षीय योजना:
  • अवधि : 01 April 1992 से  31 March 1997 तक
  • इस योजना में मानव संसाधन विकास जैसे रोजगार, शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी.
  • 1991 में नरसिम्हा राव सरकार द्वारा नई आर्थिक नीति लागू की गई; आठवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान इन आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाया गया।
  • यह योजना सफल रही थी और इसके विकास का लक्ष्य 5.6% रखा गया था लेकिन इस योजना ने 6.8% की वार्षिक वृद्धि दर हासिल की थी.
  • इस योजना के समय प्रधानमंत्री रोजगार योजना (1993 में) और राष्ट्रीय महिला कोष (March 1993 में ) की स्थापना की गयी.
नौवीं पंचवर्षीय योजना:
  • अवधि - 1997 से 2002 तक थी.
  • इस योजना का मुख्य फोकस :
    • न्याय और 
    • समानता के साथ विकास पर था.
  • इसे भारत की आजादी के 50 वें वर्ष में लॉन्च किया गया था.
  • यह योजना अपने विकास लक्ष्य 6.5% की दर को प्राप्त करने में सफल नहीं रही थी और इसने केवल 5.4% की वृद्धि दर हासिल की थी.
दसवीं पंचवर्षीय योजना:
  • अवधि - 2002 से 2007 तक थी.
  • लक्ष्य : अगले 10 वर्षों में भारत की प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करना था.
  • उद्देश्य : 2012 तक गरीबी अनुपात को 15% कम करना था.
  • इस योजना में 8.0% विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन वास्तव में केवल 7.6% की वृद्ध दर हासिल की जा सकी थी.
ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना:
  • अवधि - 2007 से 2012 तक
  • अध्यक्ष :  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
  • यह योजना सी. रंगराजन द्वारा तैयार की गयी थी
  • मुख्य थीम - "तेज़ और अधिक समावेशी विकास (गरीबी में कमी) थी.
  • इस योजना में 8.1 % विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन वास्तव में केवल 7.9% की वृद्ध दर हासिल की जा सकी थी.
  • उद्देश्य :
  • कृषि, उद्योग और सेवाओं में वृद्धि दर को क्रमशः 4%, 10% और 9% तक बढ़ाना।
  • 2009 तक सभी के लिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराएं।
  • लैंगिक असमानता में कमी।
  • शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से सशक्तिकरण।
  • इसने दूरस्थ शिक्षा, औपचारिक, गैर-औपचारिक, दूरस्थ और आईटी शिक्षा संस्थानों के अभिसरण पर ध्यान केंद्रित किया।
बारहवीं पंचवर्षीय योजना:
  • अवधि  : 01 April 2012 से  31 March 2017
  • मुख्य थीम : "तेज़, अधिक समावेशी और सतत विकास"
  • 12वीं पंचवर्षीय योजना के अनुसार, आर्थिक क्षेत्र में कृषि, उद्योग, ऊर्जा, परिवहन, संचार, ग्रामीण विकास और शहरी विकास शामिल थे, जबकि सामाजिक क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और कौशल शामिल थे.
  • इस योजना में 8 % विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन वास्तव में केवल 6.8% की वृद्ध दर हासिल की जा सकी थी.
  • उद्देश्य :
    • गैर कृषि क्षेत्र में 50 मिलियन नए काम के अवसर पैदा करना.
    • 0-3 साल के बच्चों के बीच कुपोषण को कम करना.
    • वर्ष 2017 तक सभी गांवों को बिजली उपलब्ध कराना
    • ग्रामीण आबादी के 50% जनसँख्या को उचित पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराना
    • हर साल 1 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में पेड़ लगाकर हरियाली फैलाना
    • देश के 90% परिवारों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना
  1. 12वीं पंचवर्षीय योजना भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना कही जाएगी.
  2. 2014 में निर्वाचित नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने योजना आयोग के विघटन की घोषणा की थी.