Showing posts with label History. Show all posts
Showing posts with label History. Show all posts

शैव धर्म से संबंधित

शैव धर्म

भगवान शिव की उपासना करने वाले को शैव कहते है, शिव से संबंधित धर्म को शैवधर्म कहते है।
  • शिवलिंग-उपासना का प्रारभिक पुरातात्विक साक्ष्य हड़प्पा संस्कृति के अवशेषों में मिला है।
  • वामन पुराण में शिवलिंग का पहला स्पष्ट वर्णन मत्स्यपुराण में मिलता है
  • अथर्ववेद में शिव के अन्य नाम क्या है – भव, शर्व, पशुपति, उग्र आदि।
  • ऋग्वेद में शिव  के लिए रूद्र शब्द का प्रयोग किया है।

शैव सिद्धांत में 3 प्रमुख पदार्थ/तत्व माने जाते हैं—
  1. पति (Pati) → भगवान शिव
  2. पशु (Pashu) → जीवात्मा
  3. पाश (Pasha) → बंधन
पाश के तीन प्रमुख बंधन माने जाते हैं—
  1. आणव
  2. कर्म
  3. माया
पुराण के अनुसार शैव सम्प्रदाय की संख्या 04 बताई गयी है :-
  1. पाशुपत सम्प्रदाय
  2. कापालिक सम्प्रदाय
  3. कालामुख सम्प्रदाय
  4. लिंगायत सम्प्रदाय
पाशुपत सम्प्रदाय : 
  • संस्थापक / प्रमुख आचार्य  - लकुलीश 
  • शैव धर्म का सर्वाधिक प्राचीन सम्प्रदाय - पाशुपत सम्प्रदाय
  • प्रमुख सैधान्तिक ग्रन्थ का नाम - पाशुपात सूत्र
  • श्रीकर पंडित कौन थे? - श्रीकर पंडित एक विख्यात पाशुपत आचार्य थे।
  • पाशुपत सम्प्रदाय को मानने वाले को पंचार्थिक कहा गया।
कापालिक सम्प्रदाय :
  • कापालिक सम्प्रदाय के ईष्टदेव - भैरव
  • प्रमुख केंद्र - श्री शैल नामक स्थान
कालामुख सम्प्रदाय :
  • शैव धर्म से किस सम्प्रदाय में चिता का भस्म लगता था?- कालामुख सम्प्रदाय में
  • कालामुख सम्प्रदाय में अनुयायी भोजन,जल और सुरापान किस चीज में करते है? - लोह नर-कपाल में
लिंगायत सम्प्रदाय / जंगम सम्प्रदाय / वीरशिव सम्प्रदाय :
  • प्रमुख धार्मिक ग्रंथ  - शून्य सम्प्रदाने
  • लिंगायत सम्प्रदाय दक्षिण भारत में बहुत प्रचलित था।
  • प्रमुख व्यक्तित्व → बसवन्ना
दक्षिण भारत में शैव धर्म
  • नायनारों की संख्या → 63
  • नायनारों का काल लगभग 6वीं–8वीं शताब्दी ई. माना जाता है।
  • प्रमुख नायनार संत - अप्पार, सम्बन्दर, सुंदरर, माणिक्कवाचकर
Exam Focus :
  • नायनार → शिव भक्त है। ; अलवार → विष्णु भक्त है।
  • अलवारों की परंपरा में 12 प्रमुख संत माने जाते हैं, जबकि नायनारों की संख्या 63 है।
  • गुप्तकाल में वैष्णव धर्म के साथ-साथ शैव धर्म की प्रमुखता भी रही ।
  • शिव के कितने अवतार है?- 18

सिंधु घाटी सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता

यह सिंधु नदी घाटी मे फैली हुई थी इसलिए इसका नाम सिंधु घाटी सभ्यता रखा गया। सिंधु घाटी सभ्यता भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता है। 
  • सर्वप्रथम इसकी जानकारी देने वाले - चार्ल्स मैसन  (1826 में )
  • खोजकर्ता - रायबहादुर दयाराम साहनी  ( 1921 में )
  • सर्वप्रथम हड़प्पा सभ्यता को सिंधु सभ्यता का नाम दिया - जॉन मार्शल ने
  • प्रथम अवशेष मिलें - हड्प्पा से (इसलिए इसे हड्प्पा सभ्यता माना गया )
  • इसे प्रथम नगरीय क्रांति कहा ? – गार्डेन चाइल्ड ने
सन् 1921 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक सर जॉन मार्शल के निर्देशन में रायबहादुर साहनी ने पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान ) के मोंटगोमरी जिले में रावी नदी के तट पर स्थित हड़प्पा का अन्वेक्षण किया।
 
समय सीमा :
  • सबसे पहले तिथिकाल का निर्धारण किया - जॉन मार्शल  (3250 BC- 2750 BC)
  • रेडियो कार्बन -14 पद्धति के द्वारा सर्वमान्य तिथि - 2350 BC- 1750 BC मानी गई है।
  • सिन्धु सभ्यता युग  – कांस्य युग (आद्य ऐतिहासिक) युग का माना गया हैं।
रेडियो C14 पद्धति के खोजकर्ता अमेरिका के "Willard Frank Libby" है। (खोज 1946 में की)

प्रमुख विशेषता  :

  • नगरीय ( शहरी ) सभ्यता 
  • मातृसत्तात्मक 
  • मुख्य खादान्न कृषि - गेहूँ और जौ
  • मुख्य व्यवसाय –  कृषि (लोथल और चन्हुदड़ो में मनका बनाना सबसे महत्वपूर्ण उद्योग था। )
  • प्रचलित  प्रथा – पर्दाप्रथा व वेश्यावृत्ति
  • प्रिय एवं पवित्र पशु - कूबड़ वाला सांड 
  • समाप्त होने का  कारण  - बाढ़
  • मिठास के लिए शहद का प्रयोग करते थे।
  • ये लोग कांसा धातु का अधिक प्रयोग करते थे।
  • पूजा करते थे - पशुपति शिव की (इसके अलावा मातृदेवी , पृथ्वी माता की भी ) लेकिन मंदिर के साक्ष्य नही मिले है।
  • सर्वप्रथम कपास के उत्पादन का श्रेय सिन्धु सभ्यता के लोगों को ही प्राप्त है। 
  • इस सभ्यता के लोग अपने नगरो व घरों के विन्यास के लिए ग्रिड पद्धति पद्धति अपनाते थे ।
सिन्धु लिपि सबसे पहले की भावचित्रात्मक लिपि थी, पहली पंक्ति दाएं से बाएं और दूसरी पंक्ति बाएं से दाएं ओर लिखी जाती थी।

भौगोलिक सीमाएं :
  • पूर्व में - आलमगीरपुर (मेरठ, उत्तर प्रदेश)
  • पश्चिम - सुत्कागेंडोर (बलूचिस्तान, Pakistan) 
  • उत्तर  -  मांडा (अखनूर, जम्मू कश्मीर)
  • दक्षिण  - दैमाबाद (अहमदनगर, महाराष्ट्र)
  • पूर्वी व पश्चिमी बिंदु के बीच की दूरी – 1600 किमी
  • उत्तर व दक्षिण बिंदुओ के बीच की दूरी  – 1400 किलोमीटर
  • जलीय सीमा ? – 1300 किलोमीटर
  • कुल क्षेत्रफल - त्रिभुजाकार 1299600 किलोमीटर (13 लाख वर्ग कि. मी.)
  • विश्व में कहा तक विस्तृत – पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भारत
  • भारत में कहा तक विस्तृत - राजस्थान, गुजरात, जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र तक
  • पंजाब में स्थित क्षेत्रों के नाम  – रोपड़, संघोल, चकबाड़ा, डेरमजरा, सरायकोला
  • कच्छ की खाड़ी में स्थित क्षेत्रों के नाम  – सुरकोटडा, धोलावीरा और देसलपुरा
  • अफगानिस्तान में स्थित क्षेत्रों के नाम – मुण्डीगाक और शुतुरघुई
  • पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित क्षेत्रों के नाम – सोत्काकोह, बालाकोट और सुत्कांगेडोर
प्रमुख स्थल - खोजकर्ता :
  • हड़प्पा - दयाराम साहनी (1921 में), 
  • मोहनजोदडो - रखाल दास बनर्जी (1922)
  • चन्हूदडो - अर्नेस्ट मैके  (1925)
  • लोथल - रंगनाथ राव
  • कालीबंगा - अमलानंद घोस (1951),
  • रोपड़ - यज्ञ दत्त शर्मा (1953-56 में )
  • आलमगीरपुरा - यज्ञ दत्त शर्मा (1958)
  • सुत्कांगेंडोर - ओरल स्टाईन (1927)
  • कोटदीजी - फजल हमद (1953) 
  • रंगपुर - फजल हमद (1953)
  • सोत्काहा - जार्ज डेल्ट (1962)
  • सुरकोटडा - जगपति जोशी (1964 में )
  • धोलावीरा -जे. पी. जोशी (1967-68)
  • बनवाली - रबिन्द्र सिंह बिष्ट (1974)
  • राखीगड़ी - सूरजभान (1963)
क्षेत्रफल के अनुसार स्थल :
  • मोहनजोदारो - सबसे बड़ा स्थल 
  • राखीगड़ी  - सबसे बड़ा भारतीय स्थल 
नदियों के किनारे बसे नगर :
  • मोहनजोदडो - सिन्धु नदी
  • चन्हूदडो - सिन्धु नदी
  • कोटदीजी - सिन्धु नदी
  • हड़प्पा - रावी नदी
  • लोथल - भोगवा नदी
  • कालीबंगा - घग्घर नदी
  • आलममीरपुर - हिण्डन नदी
  • रोपड - सतलज नदी
  • सुत्कांगेंडोर - दाश्क नदी
  • कुणाल - सरस्वती नदी
  • बनवाली - सरस्वती नदी के बाएं किनारे पर
  • राखीगड़ी - रंगोई नदी के किनारे , सूख गई सरस्वती नदी के बाएं किनारे पर बसा था।
  • रंगपुर -मदार नदी
  • धोलावीरा - लूनी नदी क्षेत्र खदिर बेट/खदिर द्वीप, कच्छ (गुजरात)
  • सोत्काहा - शादीकोर नदी
प्रमुख स्थल और उनकी विशेषता

हड़प्पा : पंजाब में (ज़िला साहीवाल ,पाकिस्तान )

साक्ष्य :
  • हाथी का कपाल, श्रमिक आवास
  • सबसे पहले चाँदी के साक्ष्य मिले.
  • कब्रिस्तान R-37 का साक्ष्य हड़प्पा से प्राप्त हुआ है।
  • खुदाई में टीले (नगर) मिले हैं ? – दो (पूर्वी व पश्चिमी टीला)
      1. पश्चिम दुर्ग -ऊँचाई पर स्थित थे  जिनमे उच्च वर्ग के लोग निवास करते थे।
      2. पूर्वी दुर्ग -  निचला नगर  जिनमे सामान्य लोग निवास करते थे।
विशेष :
  • प्रमुख खेल  - शतरंज, पाशा
  • हड़प्पा मुहरों पर सर्वाधिक एक श्रृंगी पशु का अंकन मिलता है।
  • हड़प्पा सैंधव सभ्यता का अर्द्ध औद्योगिक नगर कहा जाता है।
  • हड़प्पावासी तौल में किस प्रकार से व्यवहार करते थे? - 16 या उसके आर्वतों का
मोहनजोदड़ : सिंध में (ज़िला लरकाना,पाकिस्तान )

साक्ष्य :
  • वृहत स्नानगार, पशुपति शिव की मुहर ,
  • नर्तकी की कांस्य मूर्ति, घरों के अवशेष व 
  • पुजारी का भवन, कपास के साक्ष्य प्राप्त हुए
  • मोहनजोदड़ो से प्राप्त सबसे बड़ी इमारत कौन सी है? - अन्नागार (Great Granary)
विशेष :
  • मोहनजोदड़ो का अर्थ - मृतकों का टीला
  • मोहनजोदड़ों सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा शहर हैं।
कोटदीजी : सिंध में (ज़िला खैरपुर, पाकिस्तान )

चन्हूदड़ो : सिंध में (ज़िला नवाब शाह, पाकिस्तान)

साक्ष्य :
  • एक ईंट पर बिल्ली का पीछा करते हुए कुत्ते के पंजो के निशान मिले
  • वक्राकर ईंटें मिली हैं।
विशेष : चन्हूदड़ो को सिंधु सभ्यता का औद्योगिक शहर कहा जाता था।

सुतकांगेडोर : बलूचिस्तान 

साक्ष्य : प्रकृतिक चट्टान के अवशेष


लोथल : अहमदाबाद (गुजरात)

साक्ष्य :
  • हाथी का दांत ,पैमाना / तराजु ,
  • गोदीबाड़ा के साक्ष्य प्राप्त हुए ,
  • चावल के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
विशेष :
  •  यह सिंधु सभ्यता का पत्तन नगर (बंदरगाह) था।
रंगपुर: काठियावाड़  (गुजरात)
  • साक्ष्य : धान की भूसी मिली हैं।
सुरकोटडा : रापर तालुका में (ज़िला कच्छ ,गुजरात ) 

साक्ष्य :
  • घोड़े के संभावित अवशेष मिले
  • कलश में दफनाए गए शव
धोलावीरा : खदर द्वीप पर (ज़िला कच्छ ,गुजरात ) 

साक्ष्य :
  • यहाँ से (नगर) टीले 03 प्रकार के थे : दुर्ग,  मध्य नगर, निचला नगर
  • उन्नत जल-प्रबंधन प्रणाली प्रमाण मिले हैं।
  • हड़प्पा संस्कृति के सदंर्भ में शैलकृत स्थापत्य के प्रमाण मिले हैं।
रोपड़ : रोपड़ (पंजाब)

साक्ष्य :
  • आदमी के साथ कुत्ते को दफनाया गया है।
  • यहाँ पर हड़प्पा पूर्व एवं हड़प्पाकालीन संस्कृतियो के अवशेष मिले है।
बनावली : हिसार (हरियाणा )

साक्ष्य :
  • यहां से एक मकान से धावन पात्र (wash basin) लगा हुआ मिला है।
  • हल, सिक्के,पशु मूर्ति मिले हैं।- टेराकोटा से बने हुवे.
  • तांबा मछली-हुक, जले हुए जौ के दाने, अच्छे किस्म के जौ, सरसों, और तिल मिले हैं।
राखीगड़ी : हिसार ( हरियाणा ) 

साक्ष्य : मातृदेेवी अंकित एक लघु मुद्रा प्राप्त हुई।

कालीबंगा :  हनुमानगढ़  (राजस्थान)

साक्ष्य :
  • काले रंग की चूड़ियां,
  • यज्ञ कर्मकांड मिले,
  • सर्वप्रथम जोता हुआ खेत के साक्ष्य प्राप्त हुए ।
विशेष : मकान कच्ची इंटों से बने थे।

दैमाबाद  : अहमदनगर (महाराष्ट्र)

साक्ष्य : तांबे का रथ मिला

Exam Focus :
  • हड़प्पा के मिट्टी के बर्तनों पर सामान्यतः किस रंग का उपयोग हुआ था? - लाल
  • भारत में  सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक स्थल कहां खोजे गए? – गुजरात
  • सिंधु सभ्यता के प्रमुख बंदरगाह कोन सा था? – लोथल व सुतकोटदा
  • क्या सिंधु सभ्यता के लोगों को लोहे की जानकारी थी? – नहीं
  • विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता कौन सी है? - सुमेरियन सभ्यता

            इतिहास अर्थ, काल, महत्वपूर्ण तथ्य

            इतिहास 

            History शब्द - ग्रीक भाषा हिस्टोरिया (Historia) से लिया गया है। जिसका अर्थ - Inquiry/Investigation हैं।

            इतिहास जानने के मुख्य स्रोत -पत्थरों के औजार, जीवाश्म, मिट्टी के बर्तन, शिलालेख, सिक्के, मुहरें, मंदिर, मस्जिद, दुर्ग, भवन, भोजपत्र, ताड़पत्र, ताम्रपत्र, पुरातत्व तथा यात्रियों के वृत्तांत आदि हैं।

            इतिहास की परिभाषा :
            • हेनरी जॉनसन : “इतिहास, अपने व्यापक अर्थ में, वह सब कुछ है जो कभी घटित हुआ।”
            • एनसीईआरटी: “इतिहास अतीत की घटनाओं का उनके सभी पहलुओं, एक सामाजिक समूह के जीवन में, वर्तमान घटनाओं के आलोक में वैज्ञानिक अध्ययन है।”
            जनक : 
            • हिरोडोटस /Herodotus - तुर्की थे
            • इनको फादर ऑफ हिस्ट्री का उपाधि दी थी - सिसीरो ने
            • इनके द्वारा लिखित पुस्तक : The Histories
            • जन्म : लगभग 484 ई.पू. ( फारसी साम्राज्य में )

            प्रागैतिहासिक काल 

            इतिहास का वह काल है जिसके बारे में कुछ भी लिखा नहीं गया है। इस युग को तीन उपभाग में बांटा गया है :-

            (i) पुरा पाषाण काल (30K - 10K BC) - इस काल को आदिमानव का काल आखेटक एवं खाद्य संग्राहक के नाम से भी जाना जाता है।

            साक्ष्य/खोज : - 
            • इसी काल में आग की खोज हुई थी।
            • भीमबेटका की गुफा - शैलचित्रों और शैलाश्रयों के लिए प्रसिद्ध है. - रायसेन (MP) जिले में है 
            • हड्डी से बने औजार मिले - अत्तिराम्पक्कम ( मद्रास से ) 
            • सबसे पहले मानव खोपड़ी का कंकाल मिला है - हथनोरा (MP) नर्मदा नदी के किनारे से
            (ii) मध्य पाषाण काल (10K - 4K BC) - इस काल को माइक्रोलिथ भी कहा जाता है, इस काल का मानव आखेटक एवं पशु पालक था।

            साक्ष्य/खोज :
            • आदमी और स्त्री के एकसाथ दफनाए गए शव का पहला साक्ष्य मिला - महदहा (प्रतापगढ़ U.P.)
            • एकसाथ 3 लोग दफाएँ का साक्ष्य मिला - सराय नाहर (U.P.) से
            • छोटे छोटे पत्थरों के हथियार मिले।
            • कुत्ता को  प्रथम पालतू पशु बनाया गया। - साक्ष्य आदमगढ़ (MP) तथा बगोर (RJ ) से
            • अंतिम संस्कार का साक्ष्य मिला। 
            • मध्य पाषाण काल का सबसे बड़ा स्थल है - बागोर (RJ)
            (iii) नव पाषाण काल (4000 - 2500 BC) - इस काल का मानव खाद्य उत्पादक, स्थिर समुदाय में रहता था। नवपाषाण या पाषाण काल (Neolithic) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम सर जान लुबाक ने अपनी पुस्तक प्री-हिस्टारिक टाइम्स में किया था। 

            साक्ष्य /खोज :
            • मानव के साथ पालतू पशु दफनाए गए थे - बुर्जहोम में (जम्मू और कश्मीर)
            • कृषि की खोज - पहला साबुत मिला -  मेहरगढ़ (बलूचिस्तान ) ls
            • चावल की खेती का सबसे पहले साक्ष्य ?- कोल्डिहवा (इलाहाबाद ) से 
            • गेहूं की खेती,
            • स्थाई आवास का पहला साबुत मिला -  मेहरगढ़ (बलूचिस्तान )
            • राख के टिलें - संगनकल्लू (कर्नाटक) से मिले
            • पहिए की खोज,
            • मनका की खोज 
            Note - बुर्ज़ाहोम में कई प्राचीन भूमिगत गड्डे पाएं जाते हैं। इन गड्ढों को छप्परों से ढंक कर उनमें रहते थे।

            (iv) ताम्र पाषाण / चालकोलिथिक युग - इस काल में तांबे का प्रयोग शुरू हुआ लिखें।.

            आद्य ऐतिहासिक काल 

            इतिहास का वह काल जिसमें लिखित साक्ष्य तो मिलते हैं लेकिन आज तक उन्हें पढ़ा नहीं गया है।
            • सिंधु सभ्यता  (2500BC - 1750BC)
            • वैदिक सभ्यता  (1500BC - 600BC)
            • कांस्य युग 
            ऐतिहासिक काल 

            इतिहास का वह कालखंड जिसमें पढ़ने के लिए लिखित साक्ष्य उपलब्ध है उन्हें अच्छी तरीके से पढ़ा जा सकता है छठी शताब्दी महाजनपदों के उदय से शुरू होकर के आज तक ऐतिहासिक काल में रख दिया गया है।
            • इस युग को भी तीन उपभाग में बांटा गया है.  तीन भागों ( प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक ) में विभाजित करने का मुख्य श्रेय जर्मन इतिहासकार क्रिस्टोफ़ सेलियरस (Christoph Cellarius) को जाता है।
            (i). प्राचीन काल (600BC - 712AD) : 
            • वेद, उपवेद, वेदांग, ब्राह्मण ग्रंथ
            • उपनिषद, पुराण, अन्य साहित्य
            • जैन, बौद्ध, शैव, इस्लाम धर्म,
            • महाजनपद काल ,मगध साम्राज्य, मौर्य वंश, 
            • चेदी वंश, शुंग वंश, कण्व वंश, सातवाहन राजवंश, भारत पर विदेशी आक्रमण, 
            • गुप्त साम्राज्य, वाकाटक राजवंश, वर्धन वंश, दक्षिण भारत इतिहास संगम युग,
            (ii). मध्यकाल (712AD - 1707AD) :
            • अरब आक्रमण, तुर्क आक्रमण,
            • महमूद गज़नी, मुहम्मद गौरी, सल्तनत काल
            • विजयनगर साम्राज्य,बहमनी राज्य,
            • स्वतंत्र प्रान्तीय राज्य,सूफी आंन्दोलन,
            • भक्ति आन्दोलन,मुगल साम्राज्य,
            • मराठों का उन्कर्ष, प्रशासनिक फरमान
            (iii). आधुनिक काल (1707AD - अब तक ) :
            • उत्तर कालीन मुगल सम्राट, विदेशी शक्तियों का आगमन
            • अंग्रजी शासन के महत्वपूर्ण तथ्य, 1857 की क्रांति,
            • आजादी के लिए संघर्ष, प्रमुख आन्दोलन,
            • प्रमुख उपाधियां, निजी पत्र, समाचार पत्र,पत्रिकाएँ,आदि

            दिल्ली सल्तनत

            दिल्ली सल्तनत (1206-1526 ई.)

            दिल्ली सल्तनत पर कुल 5 वंशों ने शासन किया:
            1. गुलाम वंश : 1206–1290
            2. खिलजी वंश : 1290–1320
            3. तुगलक वंश : 1320–1414
            4. सैय्यद वंश : 1414–1451
            5. लोदी वंश : 1451–1526
            1. गुलाम वंश (ममलुक वंश)

            कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210 ई.)
            • गुलाम वंश का संस्थापक। यह गौरी का गुलाम था।
            • राजधानी - लाहौर में बनाई।
            • उपाधि - लाख बख्श (लाखों का दान देने वाला ) 
            निर्माण कार्य 
            • कुतुब मीनार की नींव रखी (सूफी संत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की याद में )।
            • कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद (दिल्ली) और अढ़ाई दिन का झोपड़ा (अजमेर) बनवाया।
            • मृत्यु: 1210 ई. में चौगान (Polo) खेलते समय घोड़े से गिरकर।
            2. इल्तुतमिश (1211-1236 ई.)
            • इसे दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।
            कार्य: 
            • इसने राजधानी को लाहौर से दिल्ली स्थानांतरित किया।
            • तुर्कान-ए-चहलगानी: 40 तुर्क सरदारों का एक दल बनाया।
            • भूमि दान देने की 'इक्ता प्रथा ' की शुरुआत की।
            • शुद्ध अरबी सिक्के चलाए। चांदी का टंका और तांबे का जीतल इसी ने शुरू किया।
            • कुतुब मीनार के निर्माण कार्य को पूरा करवाया।
            3. रजिया सुल्तान (1236-1240 ई.)
            • दिल्ली की पहली और अंतिम मुस्लिम महिला शासिका।
            • विवाह : इसने 'अल्तुनिया' से विवाह किया था।
            • मृत्यु: 1240 ई. में कैथल के पास डाकुओं द्वारा इसकी हत्या कर दी गई।
            4. गयासुद्दीन बलवन (1266-1286 ई.)
            • लौह एवं रक्त की नीति: विद्रोहियों को दबाने के लिए कठोर नीति अपनाई।
            • प्रथाएं: दरबार में सिजदा (घुटने टेककर सिर झुकाना) और पैबोस (सुल्तान के पैर चूमना) प्रथा शुरू की।
            • फारसी रीति-रिवाज पर आधारित 'नौरोज' उत्सव की शुरुआत की।
            • इसने इल्तुतमिश द्वारा बनाए गए 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालीसा दल) को समाप्त कर दिया।
            • एक सैन्य विभाग 'दीवान-ए-अर्ज़' की स्थापना की।
            विशेष :
            • गुलाम वंश को ममलुक वंश या इलवारी वंश भी कहा जाता है।
            • ऐबक के दरबार में 'हसन निजामी' और 'फख-ए-मुदब्बिर' जैसे विद्वान रहते थे।
            • इल्तुतमिश 'कुतुबुद्दीन ऐबक' का गुलाम और दामाद था।
            • नसीरुद्दीन महमूद ऐसा सुल्तान था जो टोपी सीकर अपना जीवन निर्वाह करता था (बलवन का दामाद)।
            2. खिलजी वंश

            1. जलालुद्दीन फिरोज खिलजी (1290–1296 ई.)
            • खिलजी वंश की स्थापना की।  ( 13 जून 1290 को )
            • राजधानी - किलोखरी 
            • उदार नीति: यह एक उदार शासक था। इसने कहा था कि "भारत एक सच्चा इस्लामी राज्य नहीं हो सकता।"
            • मृत्यु - 1296 ई. में इसके भतीजे और दामाद अलाउद्दीन खिलजी ने कड़ा-मानिकपुर (इलाहाबाद) में इसकी हत्या कर दी।
            1. सुल्तान बनने से पहले जलालुद्दीन क्या था? - बुलंदशहर का इफ्तादार
            2. जलालुउद्दीन खिलजी के शासन में अलाउद्दीन क्या था? - कड़ा मानिकपुर का सुबेदार
            2. अलाउद्दीन खिलजी (1296–1316 ई.) — अति महत्वपूर्ण
            • बचपन का नाम:  अलीगुर्शप
            • मृत्यु - 1316 ई में
            • साम्राज्य अफगानिस्तान से लेकर उत्तर – मध्य भारत तक 
            • उपाधि - सिकंदर-ए-सानी (द्वितीय सिकंदर) ,यामीन-उल-खलीफा तथा नासिर-ए-अमीरउल-मोमिनीन
            सैन्य सुधार  
            • स्थायी सेना की नींव रखी और सैनिकों को नकद वेतन देना शुरू किया।
            • घोड़ों को दागने की पद्धति शुरू की।
            • सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा शुरू की।
            • सिद्धांत चलाया - दैवी अधिकार
            बाजार नियंत्रण (Economic Reform): 
            • मूल्य नियंत्रण प्रणाली (Market Control) लागू की।
            • शहना-ए-मंडी: प्रत्येक बाजार का अधीक्षक।
            • दीवान-ए-रियासत: व्यापारी वर्ग पर नियंत्रण रखने वाला विभाग।
            राजस्व सुधार: 
            • उपज का 50% (1/2 भाग) कर (खराज) के रूप में लिया।
            • 'मुस्तखराज' नामक विभाग की स्थापना की ( भ्रष्टाचार रोकने हेतु )।
            • चराई कर (दुधारू पशुओं पर) और गढ़ी कर (घरों पर) लगाया।
            निर्माण कार्य: 
            • अलाई दरवाजा, सीरी का किला, हज़ार सितून महल और जमयत खाना मस्जिद। अलाई दरवाजा को 'इस्लामी वास्तुकला का रत्न' कहा जाता है।
            • अलाउद्दीन ने चित्तौड़ का नाम बदलकर खिज्राबाद रखा था
            1. दरबारी कवि - अमीर खुसरो ( खुसरो को 'तोता-ए-हिंद' कहा जाता है )
            2. अलाउद्दीन ने दक्षिण भारत की विजय के लिए मलिक काफूर को सेनापति बनाकर भेजा था ।
            3. खिलजी-वंश के शासक किस जाति के थे? - तुर्क जाति के
            4. गुजरात में नुसरत खाँ ने मलिक काफूर को कितने दिनार में खरीदा था? - 1 हजार दीनार
            5. दक्षिण भारत में प्रवेश करने वाला पहला मुस्लिम शासक कौन था? -अलाउद्दीन खिलजी
            3. कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी (1316–1320 ई.)
            • यह एक विचित्र शासक था। इसे नग्न स्त्री-पुरुषों की संगत पसंद थी।
            • कभी-कभी राजदरबार में स्त्रियों के वस्त्र पहनकर आ जाता था।
            • उपाधि - खलीफा 
            4. खुसरो खाँ (1320 ई.)
            • यह खिलजी वंश का अंतिम शासक था।
            • इसने 'पैगंबर के सेनापति' की उपाधि ली। इसे गाजी मलिक (गयासुद्दीन तुगलक) ने हराकर तुगलक वंश की स्थापना की।
            विशेष:
            1. मलिक काफ़ूर: इसे अलाउद्दीन ने गुजरात विजय के दौरान खरीदा था। इसे 'हजार दीनारी' भी कहा जाता है। इसने अलाउद्दीन के लिए दक्षिण भारत की विजय का नेतृत्व किया।
            2. जमीयत खाना मस्जिद: पूर्णतः इस्लामी शैली में निर्मित भारत की पहली मस्जिद।
            3. अलाउद्दीन खिलजी ने 'इक्ता प्रथा' को समाप्त कर दिया था (जिसे इल्तुतमिश ने शुरू किया था)।
            3. तुगलक वंश (सबसे लंबा शासन)

            1. गयासुद्दीन तुगलक (1320–1425 ई.)
            • संस्थापक: इसने तुगलक वंश की स्थापना की। इसने 29 बार मंगोल आक्रमणों को विफल किया।
            • उपाधि: 'गाजी' (काफिरों का वधक) की उपाधि धारण करने वाला पहला सुल्तान।
            • निर्माण: दिल्ली के पास 'तुगलकाबाद' नामक नगर बसाया और रोमन शैली में एक किला बनवाया।
            • नहरें: सिंचाई के लिए नहरें बनवाने वाला प्रथम सुल्तान था।
            • मृत्यु: बंगाल अभियान से लौटते समय 'अफगानपुर' में लकड़ी के महल के गिरने से इसकी मृत्यु हुई। (निजामुद्दीन औलिया ने इसी के लिए कहा था— "हनुज दिल्ली दूर अस्त" यानी दिल्ली अभी दूर है)।
            2. मोहम्मद-बिन-तुगलक / MBT (1325–1351 ई.)
            • मूल नाम: जूना खाँ। इसे सल्तनत काल का सबसे शिक्षित, विद्वान लेकिन 'पगला/स्वप्नशील' राजा कहा गया।
            • असफल योजनाएं (क्रमशः): दोआब में कर वृद्धि: अकाल के समय टैक्स बढ़ाया, जो असफल रहा।
            • राजधानी परिवर्तन: दिल्ली से देवगिरि (दौलताबाद) स्थानांतरित की।
            • सांकेतिक मुद्रा (Token Currency): तांबे और पीतल के सिक्के चलाए (चांदी के बराबर मूल्य), जो बड़े पैमाने पर जाली बनने लगे।
            • खुरासान एवं कराचिल अभियान: भारी सैन्य खर्च के बाद योजना रद्द की।
            • कृषि सुधार: कृषि के विकास के लिए 'अमीर-ए-कोही' (दीवान-ए-कोही) विभाग बनाया।
            • इब्नबतूता: मोरक्को का यात्री 1333 ई. में इसी के समय भारत आया। इसकी पुस्तक का नाम 'रेहला' है। सुल्तान ने इसे दिल्ली का काजी नियुक्त किया था।
            • विद्रोही: इसी के शासनकाल में दक्षिण में विजयनगर (हरिहर एवं बुक्का द्वारा) और बहमनी साम्राज्य की स्थापना हुई।
            3. फिरोज शाह तुगलक / FST (1351–1388 ई.)
            • राजस्व: इसने 24 कष्टदायक करों को समाप्त कर केवल 4 कर रखे— खराज, खुम्स, जजिया और जकात।
            • जजिया: ब्राह्मणों पर जजिया कर लगाने वाला पहला मुसलमान शासक।
            • नगर स्थापना: इसने 300 नए नगर बसाए (हिसार, फिरोजाबाद (दिल्ली), फतेहाबाद, जौनपुर, फिरोजपुर)।
            • विभाग: * दीवान-ए-खैरात: अनाथों और विधवाओं की सहायता हेतु।
            • दीवान-ए-बंदगान: दासों की देखरेख के लिए (इसके पास सबसे अधिक 1,80,000 दास थे)।
            • निर्माण: इसने अशोक के दो स्तंभों (मेरठ और टोपरा) को दिल्ली लाकर स्थापित किया।
            • आत्मकथा: इसने अपनी आत्मकथा 'फुतूहात-ए-फिरोजशाही' लिखी।
            4. नासिरुद्दीन महमूद तुगलक (अंतिम शासक)
            • इसके शासनकाल में 1398 ई. में मध्य एशिया के आक्रमणकारी तैमूर लंग ने दिल्ली पर आक्रमण किया।
            • इसके समय सल्तनत इतनी सिमट गई थी कि कहा जाता था— "शहंशाह की सल्तनत दिल्ली से पालम तक फैली है।"
            विशेष :
            1. तुगलक काल में निर्मित 'गयासुद्दीन का मकबरा' झील के बीच में स्थित है और इसकी दीवारें झुकी हुई हैं (पिरामिड की तरह)।
            2. फिरोज तुगलक ने 'अधा' और 'मिस्र' नामक सिक्के चलाए थे।
            3. जौनपुर नगर फिरोज तुगलक ने अपने भाई जूना खाँ (MBT) की याद में बसाया था।
            4. सैय्यद वंश (1414–1451 ई.)

            यह दिल्ली सल्तनत का प्रथम 'शिया' वंश था।

            1. खिज्र खाँ (1414–1421 ई.) 
            • इसने सैय्यद वंश की स्थापना की।
            • उपाधि (UP SI Special): इसने 'सुल्तान' की उपाधि नहीं ली, बल्कि 'रैयत-ए-आला' की उपाधि से ही खुश रहा।
            • तैमूर लंग का सेनापति: यह तैमूर लंग का सेनापति था। भारत लौटते समय तैमूर ने इसे मुल्तान, लाहौर और दीपालपुर का शासक नियुक्त किया था।
            • सिक्के: इसने अपने सिक्कों पर तुगलक शासकों का ही नाम रहने दिया।
            2. मुबारक शाह (1421–1434 ई.)
            • शाह की उपाधि: इसने अपने नाम से खुतबा पढ़वाया और 'शाह' की उपाधि धारण की।
            • मुबारकाबाद: यमुना नदी के किनारे 'मुबारकाबाद' नामक नगर की स्थापना की।
            • साहित्यिक संरक्षण (Lucent Fact): इसके दरबार में प्रसिद्ध विद्वान याहिया-बिन-अहमद सरहिंदी रहते थे।
            • पुस्तक: इन्होंने 'तारीख-ए-मुबारकशाही' लिखी, जो सैय्यद वंश के इतिहास का एकमात्र प्रमुख स्रोत है।
            3. मुहम्मद शाह (1434–1445 ई.)
            • इसके समय में बहलोल लोदी (लोदी वंश का संस्थापक) बहुत शक्तिशाली हो गया था।
            • इसने बहलोल लोदी को 'खाने-जहाँ' की उपाधि दी थी।
            4. अलाउद्दीन आलम शाह (1445–1451 ई.)
            • यह सैय्यद वंश का अंतिम शासक था।
            • यह अत्यंत अयोग्य और विलासी था। इसने स्वेच्छा से दिल्ली का त्याग कर दिया और बदायूँ में जाकर रहने लगा।
            • इसके वजीर 'हमीद खाँ' ने बहलोल लोदी को दिल्ली आमंत्रित किया और इस तरह लोदी वंश की शुरुआत हुई।
            विशेष :
            1. वंश का आधार: यह वंश स्वयं को पैगंबर मोहम्मद का वंशज मानता था।
            2. शासन की अवधि: सैय्यद वंश का शासनकाल लगभग 37 वर्ष रहा।
            3. प्रशासनिक सीमा: इस वंश के दौरान दिल्ली सल्तनत का क्षेत्र सबसे कम रह गया था (कहावत: "सल्तनत-ए-शाह-ए-आलम, अज़ दिल्ली ता पालम")।
            4. तैमूर लंग का प्रभाव: इस वंश के शासक तैमूर के पुत्र 'शाहरुख' को कर (Tax) भेजते थे।
            5. लोदी वंश

            1. बहलोल लोदी (1451–1489 ई.) — संस्थापक
            • स्थापना: इसने दिल्ली में प्रथम अफगान राज्य की स्थापना की।
            • इसने चांदी के 'बहलोल सिक्के' चलाए, जो अकबर के समय तक उत्तर भारत में विनिमय का मुख्य साधन रहे।
            • वह अपने सरदारों को 'मसनद-ए-अली' कहकर पुकारता था। जब उसके सरदार खड़े रहते थे, तो वह खुद भी खड़ा रहता था (समानता की नीति)।
            • इसने जौनपुर के शर्की शासकों को हराकर उसे दिल्ली सल्तनत में वापस मिलाया।
            2. सिकंदर लोदी (1489–1517 ई.) — सबसे योग्य शासक
            • इसने 1504 ई. में आगरा शहर की स्थापना की और 1506 ई. में इसे अपनी राजधानी बनाया।
            • यह फारसी कविताएँ लिखने का शौकीन था और 'गुलरूखी' उपनाम से कविताएँ लिखता था।
            कार्य: 
            • इसने ज्वालामुखी मंदिर (नगरकोट) की मूर्ति को तोड़कर उसके टुकड़ों को कसाइयों को मांस तोलने के लिए दे दिया था।
            • इसने संस्कृत के आयुर्वेद ग्रंथ का फारसी में 'फरहंगे-सिकंदरी' के नाम से अनुवाद करवाया।
            • भूमि मापने के लिए एक नया पैमाना 'गज-ए-सिकंदरी' (30 इंच) शुरू किया।
            3. इब्राहिम लोदी (1517–1526 ई.) — अंतिम सुल्तान
            • खातौली का युद्ध (1518 ई.): इसमें राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को पराजित किया था।
            • पानीपत का प्रथम युद्ध (21 अप्रैल 1526): यह युद्ध बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच हुआ। इब्राहिम लोदी युद्ध के मैदान में मारा गया।
            • यह दिल्ली सल्तनत का एकमात्र सुल्तान था जो युद्ध भूमि में लड़ते हुए मारा गया।
            • बाबर को भारत पर आक्रमण करने का निमंत्रण इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खाँ ने दिया था।
            सल्तनत कालीन प्रमुख विभाग

            विभाग कार्य संस्थापक
            दीवान-ए-मुस्तखराज वित्त विभाग (बकाया वसूली) अलाउद्दीन खिलजी
            दीवान-ए-कोही कृषि विभाग मोहम्मद बिन तुगलक
            दीवान-ए-अर्ज़ सैन्य विभाग बलवन
            दीवान-ए-बंदगान दासों की देखभाल फिरोज शाह तुगलक
            दीवान-ए-खैरात दान विभाग फिरोज शाह तुगलक

            मुग़ल साम्राज्य

            मुग़ल साम्राज्य (1526–1556)

            1. बाबर (1526–1530)
            • वास्तविक नाम - ज़हीरुद्दीन मुहम्मद बाबर
            • वंश - तैमूरी (मंगोल–तुर्क )
            • भारत में मुग़ल साम्राज्य की स्थापना की।
            • मृत्यु कहाँ हुई? - आगरा (1530)
            प्रमुख युद्ध
            • प्रथम पानीपत का युद्ध (1526) काबुल के तैमूरी शासक ज़हीर उद्दीन मोहम्मद बाबर और दिल्ली सल्तनत के अंतिम सुल्तान इब्राहिम लोदी के बीच लड़ा गया था। इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखी।
            • खानवा का युद्ध (1527): राणा सांगा पर विजय
            • चंदेरी का युद्ध (1528)
            • घाघरा का युद्ध (1529)
            महत्वपूर्ण तथ्य
            1. बाबर की आत्मकथा - तुज़ुक-ए-बाबरी ( बाबरनामा ) जो तुर्की भाषा में लिखी गई थी।
            2. हुमायूँ (1530–1556)
            • बाबर का पुत्र
            • मृत्यु - पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर
            • हुमायूँ का मकबरा कहाँ  है? - दिल्ली
            • 'हुमायूँनामा' की रचना किसने की? - गुलबदन बेगम
            • दीनपनाह' नगर की स्थापना की।
            प्रमुख घटनाएँ
            • चौसा का युद्ध (1539): इसमें शेरशाह ने हुमायूँ को पहली बार निर्णायक रूप से हराया।
            • कन्नौज का युद्ध (1540): इस युद्ध में हार के बाद हुमायूँ को दिल्ली और आगरा छोड़कर निर्वासित होना पड़ा।
            • 1555 (सरहिंद का युद्ध) में 15 वर्ष बाद ईरान के शासक की मदद से भारत में पुनः सत्ता हासिल की।
            3. अकबर ( महान ) (1556–1605)
            • संरक्षक - बैरम ख़ाँ
            • जन्म कहाँ हुआ - अमरकोट (सिंध)
            • मकबरा कहाँ है? - सिकंदरा (आगरा)
            • राज्यारोहण की आयु: 13 वर्ष (कलानौर में )
            • राजधानी बनाया - फतेहपुर सीकरी और यहाँ बुलंद दरवाजा बनवाया।
            प्रमुख युद्ध
            • द्वितीय पानीपत युद्ध (1556): उत्तर भारत के हिंदू शासक सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य (लोकप्रिय नाम- हेमू ) और अकबर की सेना के बीच पानीपत के मैदान में लड़ा गया था। विजय - अकबर
            • हल्दीघाटी का युद्ध: 1576 में अकबर (मान सिंह) और महाराणा प्रताप के बीच लड़ा गया।
            प्रशासनिक व्यवस्था
            • मनसबदारी  - मनसबदारी प्रणाली (अरबी शब्द) का अर्थ पद या रैंक है, अकबर द्वारा शुरू की गई एक प्रमुख सैन्य और प्रशासनिक व्यवस्था थी।
            • ज़ब्ती प्रणाली (राजस्व ) और  सूबेदारी व्यवस्था अकबर द्वारा शुरू की गई।
            धार्मिक नीति
            • सुलह-ए-कुल (सार्वभौमिक सहिष्णुता)
            • दीन-ए-इलाही (1582) - अर्थ है "पूर्ण शांति" या "सभी के साथ शांति"
            नवरत्न
            • अबुल फ़ज़ल, फ़ैज़ी, तानसेन, बीरबल आदि
            • अकबर के दरबार में प्रसिद्ध संगीतकार कौन थे? - तानसेन
            1. अकबरनामा या आईन-ए-अकबरी के लेखक कौन हैं? - अबुल फजल
            2. इबादतखाना' (पूजा गृह) का निर्माण कहाँ करवाया? - फतेहपुर सीकरी
            3. अकबर ने जजिया कर कब समाप्त किया? - 1564
            4. अकबर के राजस्व मंत्री कौन थे? - राजा टोडरमल
            4. जहाँगीर (1605–1627)
            • वास्तविक बचपन का नाम -सलीम
            • पत्नी: नूरजहाँ
            विशेष
            • न्याय की जंजीर  (ज़ंजीर-ए-अदल ) जिसे कोई भी नागरिक सीधा सम्राट से न्याय मांगने के लिए खींच सकता था।
            • चित्रकला का विकास किया
            • जहांगीर के शासनकाल में पुर्तगालियों द्वारा तंबाकू भारत लाया गया था।
            • जहांगीरी महल : यह आगरा के किले के भीतर स्थित है।
            5. शाहजहाँ (1628–1658)

            प्रमुख निर्माण
            • आगरा ताजमहल निर्माण पत्नी मुमताज़ महल की याद में 1632 ईस्वी में शुरू होकर लगभग 1648 ईस्वी में पूर्ण हुआ। ताजमहल का मुख्य वास्तुकार (नक्शा बनाने वाला) फारस (ईरान) के उस्ताद अहमद लाहौरी थे।
            • लाल किला और जामा मस्जिद का निर्माण शाहजहाँ ने दिल्ली में करवाया।
            • मयूर सिंहासन (तख्त-ए-ताऊस) बनवाया।
            1. स्थापत्य कला का स्वर्णकाल: शाहजहाँ के शासनकाल को वास्तुकला का स्वर्ण युग कहते हैं।
            2. शाहजहाँ ने राजधानी आगरा से दिल्ली (शाहजहानाबाद) स्थानांतरित की।

            6. औरंगज़ेब (1658–1707)
            • वास्तविक नाम: आलमगीर
            • उपाधि धारण की - 'आलमगीर' (विश्व विजेता)
            • औरंगजेब की मृत्यु: 1707 में इसकी मृत्यु के बाद मुग़ल साम्राज्य का पतन शुरू हो गया। पतन के कारण - लगातार युद्ध , धार्मिक कठोरता , उत्तराधिकार संघर्ष
            नीतियाँ
            • जज़िया कर पुनः लागू
            • दक्षिण भारत में विस्तार
            1. औरंगजेब को उसके सादगी भरे जीवन के कारण 'ज़िंदा पीर' कहा जाता था।
            2. औरंगजेब ने 9वें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर को मृत्युदंड दिया।
            3. औरंगजेब ने 1679 में जज़िया कर दोबारा लागू किया।
            4. बीजापुर और गोलकुंडा: औरंगजेब ने दक्षिण के इन राज्यों पर विजय प्राप्त की।
            5. औरंगजेब का छत्रपति शिवाजी महाराज और मराठों के साथ लंबा संघर्ष चला।
            मुग़ल प्रशासन, संस्कृति व अर्थव्यवस्था 
            1. राजभाषा : मुग़ल साम्राज्य की आधिकारिक भाषा फारसी थी।
            2. सड़क-ए-आज़म: जिसे आज GT Road कहते हैं, इसका पुनरुद्धार शेरशाह सूरी ने करवाया था (मुग़ल काल के बीच)।
            3. मुग़ल काल में भू-राजस्व वसूली की मुख्य प्रणाली दहसाला थी।
            4. बाबर ने भारत में ज्यामितीय विधि से मुग़ल गार्डन ( बाग ) लगाने की परंपरा शुरू की।
            5. मुग़ल प्रशासन केंद्रीकृत था, जिसमें सम्राट ही सर्वोच्च न्यायाधीश और सेनापति होता था।

            6. अर्थव्यवस्था - कृषि आधारित - ज़मींदारी प्रथा1857 का विद्रोह: बहादुर शाह द्वितीय ने विद्रोहियों का नेतृत्व किया, जिसके बाद उन्हें रंगून भेज दिया गया।
            7. 1858 में ब्रिटिश शासन द्वारा औपचारिक रूप से मुग़ल साम्राज्य समाप्त कर दिया गया।
            8. बहादुर शाह ज़फ़र: यह भारत का अंतिम मुग़ल सम्राट था।