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संवैधानिक विकास

संवैधानिक विकास

1600 ई0 का राजलेख ( चार्टर ) :  ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी वर्ष 1600 में एक व्यापारिक कंपनी के रूप में स्थापित हुई। इंग्लैण्ड की महारानी एलिज़ाबेथ-I ने कम्पनी को पूर्वी देशों के साथ व्यापार की अनुमति प्रदान की थी।
  • कंपनी को नाम दिया - 'द गवर्नर एंड कंपनी ऑफ़ मर्चेंट्स ऑफ़ लंदन ट्रेडिंग इन ईस्ट इंडीज़'
  • कंपनी ने मुगल बादशाह जहांगीर से व्यापार और सूरत में कारखाना लगाने की इजाज़त ली थी।
  • 1 जनवरी, 1874 को कंपनी को भंग कर दिया गया था।
1726 के राजलेख : 
  • कम्पनी को सीमित मात्रा में नियम, उपनियम , अध्यादेश जारी करने की शक्ति दी गई।
  • कलकत्ता , बम्बईं तथा मद्रास प्रेसीडेन्सी के गर्वनरों को विधि बनाने की शक्ति दी गई।
प्लासी का युद्ध (1757 ) - रॉबर्ट क्लाइव VS बंगाल नवाब सिराज-उद-दौला
बक्सर युद्ध (1764 ) - मेजर हेक्टर मुनरो VS बंगाल के नवाब मीर कासिम + बनारस राज्य के महाराजा बलवंत सिंह + अवध के नवाब शुजा-उद-दौला  + मुगल साम्राज्य शाह आलम II { अंग्रेजों ने जीत लिया और ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन बंगाल पर हो गया। }
  • बंगाल के प्रथम गवर्नर - रॉबट क्लाइव
इसके बाद समय-समय पर अनेक एक्ट पारित किये जो भारतीय सविधान के विकास की सीढियां बनी।
पारित प्रमुख एक्ट 

ईस्ट इण्डियां कम्पनी शासन 1773-1858 ब्रिटिश क्राउन शासन 1858-1947
रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 भारत सरकार अधिनियम, 1858
एक्ट ऑफ़ सेटलमेंट, 1781 भारतीय परिषद अधिनियम, 1861
पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 भारतीय परिषद अधिनियम, 1892
चार्टर अधिनियम, 1793 मार्ले-मिंटो सुधार अधिनियम, 1909
चार्टर अधिनियम, 1813 मांटेग्यू-चम्सफोर्ड सुधार अधिनियम, 1919
चार्टर अधिनियम, 1833 भारत शासन अधिनियम, 1935
चार्टर अधिनियम, 1853 भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947

रेगुलेटिंग एक्ट 1773 :
  • इसके तहत बंगाल के गवर्नर का नाम बदल कर गवर्नर जनरल रखा गया और प्रथम गवर्नर जनरल नियुक्त हुआ - वारेन हेस्टिंग्स
  • बंगाल की सर्वोच्च परिषद पर गवर्नर-जनरल के साथ काम करने के लिए 04 सदस्य जॉन क्लेवरिंग, जॉर्ज मॉन्सन, रिचर्ड बारवेल और फिलिप फ्रांसिस नियुक्त किये।
  • बम्बईं तथा मद्रास प्रेसीडेन्सी बंगाल के गवर्नर-जनरल के नियंत्रण में किये।
  • कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय (1774 में ) की स्थापना की गई थी। { प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलीजा इम्पी  तथा अन्य न्यायाधीश चेम्बर्ज, लिमैस्टर और हाइड को नियुक्त कर दिया गया  }
एक्ट ऑफ़ सेटलमेंट 1781 :

  • रेगुलेटिंग एक्ट 1773 की कमियों की दूर किया।
  • इसके तहत कलकत्ता की सरकार को बिहार, बंगाल, उड़ीसा के लिए कानून बनाने का प्राधिकार मिला।
पिट्स इंडिया एक्ट 1784 :
  • गवर्नर जनरल की परिषद के सदस्यों को 04 से 03 कर दिया।
  • कंपनी द्वारा भारत में ब्रिटिश संपत्ति का दोहरा नियंत्रण हुआ। { (बोर्ड ऑफ़ कण्ट्रोल - राजनीति मसलों के लिए ) (बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स - व्यापारिक मसलों के लिए ) }
  • इंग्लैण्ड में एक कोर्ट की स्थापना की गई जो भारत में स्थापित कोर्ट के अधिकारियों के अवैध कार्य के मुकदमें देखेगी।

1793 का राजलेख : 
  • इस अधिनियम ने कंपनी को भारत में ब्रिटिश क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण जारी रखने की अनुमति दी।
  • नियंत्रण बोर्ड के सदस्य और कर्मचारी का वेतन भारतीय राजस्व से दिया जायेगा प्रावधान किया गया।
  • कंपनी का अधिकार अगले 20 वर्षो के लिए बढ़ा दिया गया।

1813 का राजलेख :
  • ईसाई धर्म प्रचारकों को भारत में धर्म प्रचार करने की स्वीकृति प्रदान की गई।
  • भारत के साथ व्यापार पर कंपनी के एकाधिकार को समाप्त कर दिया। परन्तु चीन से चाय का व्यापार ऐसे ही चलता रहेगा।
  • कंपनी द्वारा 1 लाख रुपया भारतियों की शिक्षा पर खर्च करने का प्रावधान किया गया।
1833 का राजलेख :
  • चीन से व्यापार पर कंपनी के एकाधिकार को समाप्त कर दिया।
  • विधि आयोग का गठन किया गया, इसकी अध्यक्षता लॉर्ड मैकाले ने की थी।
  • बंगाल के गवर्नर जनरल को पुरे भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया और भारत के प्रथम गवर्नर जनरल नियुक्त हुआ - लॉर्ड विलियम बेंटिक
1853 का राजलेख :
  • सिविल सेवा परीक्षा की शुरुआत हो गई थी और 1854 लार्ड मैकाले समिति की नियुक्त की गई।
  • इसके तहत कार्यपालिका एवं विधायिका सम्बंधी शक्तियों का पृथक्करण हुआ और गवर्नर जनरल को वीटो का अधिकार मिला।
भारत में सिविल सेवा का जनक - ब्रिटिश जनरल चार्ल्स कॉर्नवालिस
भारत में लोक सेवा आयोग की स्थापना 1 अक्टूबर, 1926 को हुई थी।

भारत शासन अधिनियम 1858 : 
  • कम्पनी का शासन महारानी विक्टोरिया के हाथों में चला गया।
  • भारत का गवर्नर जनरल को भारत का वायसराय बना दिया और भारत के प्रथम वायसराय नियुक्त हुआ - लॉर्ड कैनिंग {1856 से 1862 }
  • बोर्ड ऑफ़ कण्ट्रोल और बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स को समाप्त कर दिया।
  • इसके तहत मुगल सम्राट पद भी समाप्त कर दिया गया।
भारत शासन अधिनियम 1861 : 
  • वायसराय को अध्यादेश जारी करने की शक्ति मिली। जिसे आपातकाल के समय 6 माह के लिए वह जारी कर सकता था।
  • लॉर्ड कैनिंग के द्वारा विभागीय प्रणाली की शुरूवात की गई।
भारत शासन अधिनियम 1892 : 
  • इसके तहत अप्रत्यक्ष चुनाव की शुरूवात हुई थी।
मार्ले-मिंटो सुधार अधिनियम 1909 :
  • इसके तहत साम्प्रदायिक निर्वाचन की शुरूवात हुई जिसके जनक लार्ड मिन्टों है। 
  • साम्प्रदायिक निर्वाचन को लेकर भारत के राज्य सचिव जॉन मॉर्ले ने वायसराय लॉर्ड मिंटो से कहा था "हम नाग के दांत बो रहें है इसका फल भीषण होगा।"
  • केंद्रीय विधान परिषद के सदस्यों की संख्या 16 से बढ़ाकर 60 कर दी गई।
  • वायसराय परिषद मे पहला भारतीय सदस्य सत्येन्द्र प्रसाद सिन्हा को नियुक्त किया गया।
अगस्त घोषणा (20 अगस्त 1917)

घोषणाकर्ता: एडविन मांटेग्यू (भारत सचिव)। इस समय वायसराय रहें - लार्ड चेम्सफोर्ड { कार्यकाल 1916 - 1921 तक }था। इस समय इंग्लैंड का प्रधानमंत्री लाॅयड जार्ज था।

रोलेट एक्ट (1919) / ब्लैक एक्ट : 
  • मूल नाम: द अनार्किकल एंड रिवोल्यूशनरी क्राइम्स एक्ट, 1919
  • उद्देश्य: प्रथम विश्व युद्ध के बाद भारत में बढ़ रही राष्ट्रीय और क्रांतिकारी गतिविधियों को कुचलना।
  • अध्यक्ष: सर सिडनी रोलेट (राजद्रोह समिति)।
  • प्रान्तों में द्वैध शासन की स्थापना की गई :आरक्षित (Reserved): वित्त, पुलिस, राजस्व - गवर्नर के पास और हस्तांतरित (Transferred): शिक्षा, स्वास्थ्य -भारतीय मंत्रियों के पास।
  • नियम: बिना वारंट गिरफ्तारी और 2 साल तक बिना मुकदमे के जेल।
  • केंद्र में द्विसदन: पहली बार उच्च सदन (राज्य परिषद) और निम्न सदन (विधान सभा) बने।
  • मताधिकार: महिलाओं को सीमित वोट का अधिकार मिला; 
  • सिखों, ईसाइयों व एंग्लो-इंडियनों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र बने।
पंडित मोतीलाल नेहरू ने रोलेट एक्ट (1919) के विरोध में नारा दिया था। "ना कोई वकील, ना कोई दलील, ना कोई अपील"। गांधीजी ने इसे 'काला कानून' कहा। पजाब के नेता डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल गिरफ्तार हुए। सीधा असर: जलियांवाला बाग में शांतिपूर्ण विरोध।

जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919)
  • स्थान: अमृतसर (बैसाखी का दिन)।
  • घटना:  शांतिपूर्ण विरोध पर जनरल डायर द्वारा गोलीबारी।
  • जिस कारण 1920 में महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन की शुरुआत की गई।
संस्थान: लोक सेवा आयोग (PSC) के गठन का प्रावधान (1926 में 'ली आयोग' पर गठित)।

समीक्षा प्रावधान: अधिनियम के कामकाज की समीक्षा के लिए 10 वर्ष बाद एक सांविधिक आयोग (Statutory Commission) गठित करने की व्यवस्था थी (जिसके परिणामस्वरूप 1927 में साइमन कमीशन का गठन हुआ)।

साइमन कमीशन विरोध व लाठीचार्ज (30 अक्टूबर 1928) :
  • विरोध का कारण: इसमे सभी 7 सदस्य अंग्रेज (श्वेत कमीशन); किसी भी भारतीय को शामिल न करना।
  • जब साइमन कमीशन लाहौर रेलवे स्टेशन पहुंचा, तो लाला लाजपत राय ने काले झंडों और "साइमन गो बैक" के नारों के साथ इसका शांतिपूर्ण नेतृत्व किया। लाहौर के पुलिस अधीक्षक जेम्स ए. स्कॉट के आदेश पर पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स ने भीड़ पर बर्बरता से लाठियां चलवाईं, जिसमें लालाजी के सिर और छाती पर गंभीर चोटें आईं। चोटों के कारण 17 नवंबर 1928 उनका निधन हो गया।
  • प्रसिद्ध कथन: "मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत की आखिरी कील साबित होगी।"
क्रांतिकारी बदला (सॉन्डर्स हत्याकांड): लालाजी की मृत्यु का बदला लेने के लिए भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और चंद्रशेखर आज़ाद (HSRA) ने 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स को गोली मारकर मौत के घाट उतारा।

गोलमेज सम्मेलन (1930–1932) :
  • स्थान: लंदन (ब्रिटिश पीएम: रैम्से मैकडोनाल्ड)।
  • क्यों हुआ: साइमन कमीशन रिपोर्ट पर चर्चा, सविनय अवज्ञा आंदोलन का समाधान और भावी संविधान (1935 एक्ट की नींव) तैयार करने हेतु।
  • गोलमेज सम्मेलन प्रथम (1930) , द्वितीय (1931), तृतीय (1932) में 
  • तीनों में शामिल: डॉ. बी. आर. आंबेडकर और तेज बहादुर सप्रू।
  • कांग्रेस का रुख: सिर्फ दूसरे गोलमेज सम्मेलन (1931) में भाग लिया (गांधी-इरविन समझौते के बाद गांधीजी प्रतिनिधि बने)।
  • प्रमुख नतीजा: इसी मंथन से भारत शासन अधिनियम 1935 बना।
भारत शासन अधिनियम 1935 :
  • लागू हुआ - 1937 में , निरस्त - 26 जनवरी 1950 को  {अनुसूचियां - 10 , अनुच्छेद - 321}
  • इसके तहत साम्प्रदायिक निर्वाचन का पुनः विस्तार किया गया, जिसमें दलित, मजदूर, महिला आदि वर्ग सामिल किये।
  • यह लॉर्ड लिनलिथगो के नेतृत्व वाली संयुक्त चयन समिति की रिपोर्ट पर आधारित था। लार्ड लिनलिथगो 1936 से 1944 तक भारत के वायसराय थे।
  • राज्य में द्वैध शासन समाप्त कर, केन्द्र में द्वैध शासन किया गया।
  • भारत में संघीय न्यायालय ( 01 Oct 1937 ) की स्थापना की गयी। प्रथम मुख्य न्यायाधीश बने - मॉरिस लिंफोर्ड गियर
  • RBI की स्थापना गई। जिसके पहले गर्वनल जनरल बने - ओसबोर्न स्मिथ
भारत का अंतिम वायसराय - लॉर्ड लॉरेंसमाउंटबेटन {12-02-1947 to 15-08-1947}
इसने भारत को आज़ादी दिलाने के लिए माउंटबेटन योजना ( 3 Jun 1947 ) प्रस्तुत की, जिसे 18 जुलाई 1947 को शाही स्वीकृति प्राप्त हुई। इस समय इंग्लैंड का प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली था।

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 :
  • प्रस्ताव पेश - 4 July 1947, पारित - 18 July 1947 , धाराएं - 20
  • इसके तहत भारत का विभाजन हुआ ( 15 अगस्त 1947 में )
  • वायसराय पद गर्वनर जनरल पद बन गया और स्वतंत्र भारत के प्रथम गर्वनर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन को ही बनाया गया।
  • स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय व्यक्ति गर्वनर जनरल सी. राजगोपालाचारी थे।

संघ ( भाग - 05 )

संघ 
{ भाग - 05, 52-151 }

राष्ट्रपति 

राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक होता है। राष्ट्रपति देश का औपचारिक प्रमुख पद ब्रिटेन से लिया गया है।

अनुच्छेद 52 : भारत का एक राष्ट्रपति होगा।

अनुच्छेद 53 : संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी जिसका प्रयोग वह प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार करेगा।

अनुच्छेद 54 : राष्ट्रपति का निर्वाचन : इसका निर्वाचन एकल संक्रमणीय अनुपातिक पद्धति द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से कराया जाता है।

अनुच्छेद 55 : कोटा : इसमें जमानत जब्त होने के बाद भी प्रत्याशी जीत सकता है किन्तु कोटा से काम वोट पाने पर भी जीते हुए प्रत्याशी को भी हटा दिया जाता है।

अनुच्छेद 56 : राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्षो का होता है।

अनुच्छेद 57 : दुबारा निर्वाचन  :  एक व्यक्ति दुबारा राष्ट्रपति के लिये निर्वाचित हो सकता है।

अनुच्छेद 58 : योग्यता :  1. भारत का नागरिक होना चाहिए , 2. 35 वर्ष आयु होनी चाहिए , 3. लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यता होनी चाहिए , 4. 50 प्रस्तावक तथा 50 अनुंडक होनी चाहिए।

अनुच्छेद 59 : दशाएं / शर्तें : 1. पागल या दिवालिया न हो , 2. लाभ के पद पर न हो , 3. संसद या विधानमंडल में सदस्य न हो।

अनुच्छेद 60 : राष्ट्रपति को शपथ सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य /वरिष्ठतम न्यायाधीश दिलाते हैं।

अनुच्छेद 61 : महाभियोग : यह U S A के संविधान से लिया गया है। राष्ट्रपति पर महाभियोग दोनों सदनों यानि उच्च सदन या निम्न सदन कोई भी शुरू कर सकता है जिस सदन से महाभियोग शुरू होगा उस सदन का 25% सदस्य अनुमोदित करेंगे। उसके बाद वह सदन 2 / 3 बहुमत से महाभियोग पारित करेगा। उसके बाद वह दूसरे सदन को भेजने से 14 दिन पूर्व राष्ट्रपति को सुचना दी जाएगी ।उसके बाद दूसरे सदन में भी यदि 2 / 3 बहुमत से पारित हो जायेगा तब राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाया जायेगा ।

अनुच्छेद 62 : राष्ट्रपति के रिक्त पद को भरने के लिए राष्ट्रपति का निर्वाचन पदवधि की समाप्ति से पहले ही कर लिया जायेगा।

उपराष्ट्रपति 

अनुच्छेद 63 - भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।

अनुच्छेद 64 : यह राज्यसभा के पदेन सभापति भी होगें।
 
अनुच्छेद 65 : राष्ट्रपति पद खाली होनें पर उपराष्ट्रपति कार्यवाहन राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेंगें इसलिये इनकों वेतन व भत्ते राष्ट्रपति वालें मिलेगें।
नोट: वोट नही डालेंगें लेकिन निर्णायण वोट डाल सकते है।

अनुच्छेद 66 : नियुक्ति
  • चुनाव :  गुप्त, अप्रत्यक्ष, एकल संक्रमणीय व समानुपातिक प्रतिनिधित्व के अुनसार
  • योग्यता :  भारत के नागरिक हो, 35 वर्ष आयु, राज्य सभा के सदस्य चुने जाने की योग्यता
अनुच्छेद 67 : कार्यकाल -
  • 5 वर्ष
  • त्यागपत्र :  राष्ट्रपति को देंगें।
  • पद से हटाना - राज्य सभा में प्रस्ताव लाया जायेगा। 50 प्रतिशत से अधिक पर प्रस्ताव पारित होना चाहिए और लोक सभा की केवल अनुमति चाहिए।
अनुच्छेद 69 : शपथ : राष्ट्रपति या उनके द्वारा नियुक्त कोई व्यक्ति इनको शपथ दिलाएगा।

प्रधानमंत्री एवं मत्रीपरिषद् 

अनुच्छेद 74 :राष्ट्रपति जी प्रधानमत्री व उसकी मंत्रीपरिषद् की सलाह पर काम करेंगें।

अनुच्छेद 75 : राष्ट्रपति प्रधानमत्री व उसकी मंत्रीपरिषद् की नियुक्ति करेंगें। 

नोट: मत्रीपरिषद् लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। लेकिन व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति के प्रति उत्तरदायी है।
कौन बनेगा प्रधानमंत्री - 
  • लोक सभा या राज्य सभा का सदस्य
  • सदस्य न होनें पर 6 महीनें में उसे दोनेां सदनों में से किसी में सदस्यता ग्रहण करनी होगी। साथ ही साथ लोक सभा में बहुमत भी हासिल करना होगा।
संसद 

भारत सरकार की संसदीय प्रणाली ब्रिटिश संविधान से अभिप्रेरित है। 
ससंद के 03 अंग हैं - राष्ट्रपति, राज्यसभा, लोकसभा। संसद के  02 सदन है : राज्यसभा, लोकसभा

अनुच्छेद 80 : राज्यसभा
  • अन्य नाम - राज्‍यों की परिषद / उच्च सदन / स्‍थायी सदन
 राज्यसभा सदस्य संख्या :
  • अधिकतम सदस्य - 250 {12 मनोनीत + 238 निर्वाचित }
  • वर्तमान सदस्य - 245 {12 मनोनीत + 233 निर्वाचित (225 State + 08 UT ) }
08 UT = Delhi 03 +  Pondicherry 01 + J&K 04

राज्य सभा की शक्तियां :
  • उपराष्ट्रपति को हटानें का पहला प्रस्ताव राज्य सभा में ही लाया जायेगा।
  • Ar.312 - अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के सृजन की शक्ति ( विशेष बहुमत से)
  • Ar.249 - राज्य सूची के विषय में परिवर्तन का अधिकार है।
अनुच्छेद 81 : लोकसभा
  • अन्य नाम - लोगों का सदन / निम्न सदन / प्रथम सदन / लोकप्रिय सदन / प्रतिनिधि सभा
  • लोकसभा में (अनुच्छेद 331 ) और राज्य विधानसभा में (अनुच्छेद 333) के लिए एंग्लो इंडियन आरक्षित सीटों को जनवरी 2020 में 104वें संविधान संशोधन अधिनियम 2019 द्वारा समाप्त कर दिया गया।
लोकसभा सदस्य संख्या :
  • अधिकतम सदस्य - 550 { 550 निर्वाचित (530 State + 20 UT ) }
  • वर्तमान सदस्य - 543 { 543 निर्वाचित (524 State + 19 UT ) }
19 UT = Delhi 07 +  Other UT 12

लोक सभा की शक्तियां :
  • Ar. 110 मनी बिल लोकसभा में ही लाया जायेगा। राज्य सभा केवल 14 दिन तक उसे रोक कर सुझाव दे सकती है पर बाध्य नही कर सकती।
  • Ar. 108 स्ंयुक्त सत्र को राष्ट्रपति बुलाएगा। सुयक्त सत्र की अध्यक्षता लोकसभा का स्पीकर करेगा।
अनुच्छेद 83 :सदनों की अवधि 
  • राज्य सभा - सदस्य कार्यकाल : 06 वर्ष तक ( जिनमे 1/3 सदस्य हर 02 साल में सेवा-निवृत होते हैं। ){ इसे भंग नहीं किया जा सकता। }
  • लोक सभा : 5 वर्ष या प्रधानमंत्री की सलाह पर समय से पहले राष्ट्रपति इसे भंग / विघटितकर कर सकता है।
अनुच्छेद 84 : सदन योग्यता 
  • भारत का नागरिक हो !
  • लोक सभा का सदस्य 25 वर्ष, 
  • राज्यसभा के लिए 30 वर्ष होनी चाहिए।
  • संसद द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार अन्य योग्यताएँ।
अनुच्छेद 85 : संसद‌ के सत्र, सत्रावसान और विघटन
  • राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को बुलाता है।
  • दो सत्रों के बीच 6 महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए।
  • राष्ट्रपति सदन/सदनों का सत्रावसान (Prorogation) कर सकता है।
  • राष्ट्रपति लोकसभा को भंग कर सकता है।
Exam Point :
  • सत्र - मानसून सत्र जुलाई से सितम्बर, शीतकालीन सत्र नवम्बर से, बजट सत्र :फरवरी से अप्रैल/मई
  • सत्रावसान  - सत्र की समाप्ति इसकी घोषणा राष्ट्रपति करता है।
  • लोकसभा एवं राज्यसभा में मतभेद होने पर संयुक्त बैठक होती है। अब तक 3 बार संयुक्त सत्र हुआ। 1961 दहेज प्रथा पर, 1978 बैकिग सुधार पर, पोटा का बिल टेरीरिसम रोकने के लिए।
  • भारतीय संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक साधारण विधेयक, सामान्य बहुमत से सम्बन्धित है।
  • संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभाध्यक्ष करता है ।
  • संसद के संयुक्त बैठक को राष्ट्रपति सम्बोधित करता है। 
  • अस्थायी ससंद भारत में 17 अप्रैल, 1952 तक अस्तित्व में रही।
  • भारतीय संसद की सम्प्रभुता प्रतिबंधित है - न्यायिक समीक्षा से
  • लोक सभा के पहले अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलेंकर थे।
  • लोकसभा का प्रथम सत्र 13 मई 1952 को आरंभ हुआ था।

तिरंगा ( राष्ट्रीय ध्वज )

 राष्ट्रीय ध्वज भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक है।

तिरंगे सामान्य अर्थ :

भारतीय तिरंगे के रंगों का प्रतीकात्मक अर्थ:

  • केसरिया (ऊपर) → साहस, त्याग और बलिदान का प्रतीक।
  • सफेद (बीच में) → शांति, सत्य और ईमानदारी का प्रतीक।
  • हरा (नीचे) → समृद्धि, विकास और प्रकृति का प्रतीक।
  • अशोक चक्र  (24 तीलियाँ ) → धर्म, न्याय, प्रगति और निरंतर गतिशीलता का प्रतीक।
  • अनुपात: 3 : 2 ( लंबाई : चौड़ाई ) होता है।
अशोक चक्र :
  • रंग गहरा नीला (Navy Blue)
  • तिल्लियाँ (Spokes): 24
  • इसे धर्म चक्र / अशोक चक्र कहा जाता है।
  • अशोक चक्र सारनाथ के सिंह स्तंभ के धर्मचक्र से लिया गया है।
  • पारंपरिक रूप से ध्वज निर्माण में खादी कॉटन/खादी सिल्क का उपयोग किया जाता रहा है।
  • राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण और प्रदर्शन से संबंधित नियम Flag Code of India, 2002 में दिए गए हैं।

Exam Focus :

  1. भारत के राष्ट्रीय ध्वज को अपनाने का प्रस्ताव संविधान सभा में किसने रखा था? - जवाहरलाल नेहरू
  2. स्वतंत्र भारत में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज कब फहराया गया? — 15 अगस्त 1947.राष्ट्रीय ध्वज से संबंधित मूल कर्तव्य किस अनुच्छेद में निहित हैं? : Article 51A (विशेष रूप से 51A(a))
  3. भारत के राष्ट्रीय ध्वज को किसने डिजाइन किया? → पिंगली वेंकैया
  4. राष्ट्रीय ध्वज संविधान सभा ने कब अपनाया ( अंगीकृत ) गया? → 22 जुलाई 194722

संविधान प्रस्तावना से संबंधित

प्रस्तावना 
( Preamble )

हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी,
पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य, बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों कोः
सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए,
तथा उन सब में, व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता, सुनिश्चित करने वाली बन्धुता बढ़ाने के लिए दृढसंकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई. (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत दो हजार छह विक्रमी) को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।

परीक्षा उपयोगी तथ्य :

भारतीय संविधान की उद्देशिका आस्ट्रेलियाई संविधान से प्रभावित मानी जाती है, उद्देशिका संविधान का सार है, जो संविधान के उद्देश्यों और संविधान के दर्शन को प्रदर्शित करती है।
  • 13 दिसंबर, 1946 - संविधान सभा में देश के प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरू ने प्रस्तावना (Preamble) को पेश किया, जिसे उद्देश्य प्रस्ताव (Objective Resolution) कहा गया, इसे 22 जनवरी, 1947 में अपना लिया गया.
>गोलक नाथ बनाम पंजाब राज्य AIR 1967 SC 1643 के मामले में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश, सुब्बा राव ने यह कहा था कि “एक अधिनियम की प्रस्तावना, उसके उन मुख्य उद्देश्यों को निर्धारित करती है, जिसे प्राप्त करने का इरादा कानून रखता है”
  • बेरुबाड़ी वाद ( वर्ष 1960 ) : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है।
  • केशवानंद भारती वाद : सर्वोच्च न्यायालय ने 24 अप्रैल, 1973 को संविधान की ‘मूल संरचना’ (Basic Structure) का ऐतिहासिक सिद्धांत दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा है।
इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए सन 1976 में 42वां संविधान संशोधन किया गया था जिसमें तीन नए शब्द समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता को जोड़ा गया था, स्वर्ण सिंह कमेटी की सिफारिश के आधार पर 10 मौलिक कर्तव्य को शामिल किया गया।
  • 42 वें संविधान संशोधन को मिनी कांस्टिट्यूशन कहा जाता है। 
  • अब तक भारत के संविधान की उद्देशिका में कितनी बार संशोधन किया जा चुका है? – 01 बार
प्रस्तावना में लिखित कुछ शब्दों से अर्थ :
  • हम भारत के लोग  – संविधान का निर्माण भारत की जनता द्वारा हुआ है
  • समाजवाद का अर्थ – सामाजिक न्याय
  • सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न ( सम्प्रभुता ) - भारत आन्तरिक और बाहरी रूप से निर्णय लेने के लिए स्वतन्त्रत है।
  • पंथनिरपेक्ष / Secular- राज्य की दृष्टि में सभी धर्म समान हैं और धर्म ,पंथ एवं उपासना रीति के आधार पर राज्य किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करेगा। किसी भी धर्म विशेष के लिए झुकाव या रंजिश नहीं रखना।
  • भारत एक गणतंत्र है – भारत में वंशानुगत शासन नहीं है।
  • प्रस्तावना में स्वतंत्रता कितने प्रकार की हैं - 05 
    • विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म , और उपासना की स्वतंत्रता
  • प्रस्तावना में न्याय कितने प्रकार के हैं - 03 
    • सामाजिक न्याय, राजनीतिक न्याय व आर्थिक न्याय
  • प्रस्तावना में समानता कितने प्रकार की हैं - 02
  • अवसर की समानता और प्रतिष्ठा की समानता
  1. संविधान की उद्देशिका में संघ, मताधिकार प्रयोग कहीं भी नहीं किया गया है।
  2. प्रस्तावना को संविधान का पहचान पत्र कहा है?  - एन .ए. पालकीवाला ने 
  3. भारतीय संविधान की आत्मा , संविधान की कुंजी किसे कहा जाता है? – प्रस्तावना
  4. संविधान निर्माताओं ने किस पर विशेष ध्यान दिया था? – प्रस्तावना पर
  5. संविधान की उद्देशिका में नहीं है? – लोक कल्याण
  6. संविधान के अंतर्गत भारतीय लोकतंत्र के आदर्शों को हम कहां देख सकते हैं? – प्रस्तावना
  7. भारत की संप्रभुता एकता तथा अखंडता को बनाए रखने तथा उसकी रक्षा करने का प्रावधान किसमें किया गया है? – प्रस्तावना में
  8. प्रस्तावना का वह प्रावधान, जो सभी वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार प्रदान करता है, कहलाता है – प्रजातंत्र

भारतीय संविधान की अनुसूचियाँ

भारतीय संविधान की अनुसूची

भारत के मूल संविधान में मूलतः 08 अनुसूचियाँ थीं. परन्तु वर्तमान में भारतीय संविधान की 12 अनुसूचियाँ  है। 

पहली : इस अनुसूची में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाम और उनकी सीमाएँ का विवरण है।
  • यह अनुच्‍छेद 1 और अनुच्‍छेद 4 की व्‍याख्‍या है। 
दूसरी : इसमें देश के विभिन्न उच्च पदाधिकारियों को प्राप्त होने वाले वेतन, भत्ते और पेंशन इत्यादि उल्लिखित हैं ।
  • उच्‍च संवैधानिक पदों जैसे राष्‍ट्रपति, राज्‍यपाल, लोक सभा के अध्‍यक्ष एवम् उपाध्‍यक्ष, राज्‍य सभा के सभापति एवम् उपसभापति, राज्‍य विधान सभाओें के अध्‍यक्ष एवम् उपाध्‍यक्ष, राज्‍य विधान परिषदों के सभापति और उपसभापति, उच्‍च न्‍यायालयों एवं उच्‍चतम् न्‍यायालय के न्‍यायाधीशों, नियंत्रक-महालेखा परीक्षक आदि के वेतन व भत्‍तों का विवरण है।
तीसरी : इसमें विभिन्न पदाधिकारियों (मंत्री, उच्चतम / उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ) द्वारा पद - ग्रहण के समय ली जाने वाली शपथ का उल्लेख किया गया है।

चौथी : राज्यसभा में सदस्यों का प्रतिनिधित्व ( सीटों का आवंटन ) का उल्लेख किया गया है।

पांचवी : इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन तथा नियंत्रण से संबंधित उपबंध है।

छठी : असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के प्रशासन से संबंधित उपबंध है।
  • जनजातीय लोगों (आदिवासियों) के अधिकारों की रक्षा का प्रावधान करती है।
  • अनुच्छेद 244 (2) और 275 (1) विशेष प्रावधान
सातवीं : इसमें केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों के बंटवारे के बारे में बताया गया है।

इसमें 03 सूचियाँ है : -

I. संघ सूची - 

  • इसके विषयों पर केंद्र सरकार कानून बनाती है। { विषय - मूल 97 ,  वर्तमान 100 }
  • प्रमुख विषय - रक्षा, रेलवे, पोस्ट और टेलीग्राफ़, आयकर, कस्टम ड्यूटी
II. राज्य सूची - 
  • इसके विषयों पर राज्य सरकार कानून बनाती है। { विषय - मूल 66, वर्तमान 61}
  • प्रमुख विषय - पुलिस, परिवहन, सार्वजनिक व्यवस्था ,स्वास्थ्य, कृषि, जेल, उत्पादन, विनिर्माण, 
III. समवर्ती सूची - 
  • इसके विषयों पर केंद्र एवं राज्य दोनों सरकारें कानून बना सकती हैं। परंतु कानून के विषय समान होने पर केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून ही मान्य होता है। { विषय - मूल 47, वर्तमान 52 }
  • प्रमुख विषय - शिक्षा, वन, विवाह ,दत्तक अभिग्रहण, जनसंख्या नियंत्रण, वन्यजीवों और जानवरों की सुरक्षा
आठवीं: इसमें भारत की 22 भाषाओँ का उल्लेख किया गया है। 

मूल संविधान में कुल 14 भाषाएँ थीं। 
  • 21 वाँ संशोधन 1967 में सिन्‍धी, 
  • 71वाँ संविधान 1992 में कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली, 
  • 92वें 2003 में बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को जोड़ा गया जो 2004 में लागू हुआ।
नौवीं  : नवीं अनुसूची में  राज्य द्वारा संपत्ति के अधिग्रहण की विधियों का उल्लेख किया गया है।
  • नौवीं अनुसूची में सम्मिलित विषयों को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है। .
  • प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम 1951 के द्वारा जोड़ी गई।
दसवीं : इसमें दल-बदल से संबंधित प्रावधानों का उल्‍लेख है। 
  • 52वें संविधान संशोधन अधिनियम 1985 के द्वारा जोड़ी गई।
ग्यारहवीं : इस अनुसूची के आधार पर ‘पंचायती राजव्‍यवस्‍था’ को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है। 
  • इसमें 29 विषय हैं। 
  • इस अनुसूची को 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ा गया।
बारहवीं : इसमें  नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, अधिकार और जिम्मेदारियाँ शामिल हैं।
  • इस अनुसूची के आधार पर शहरी क्षेत्र की स्‍थानीय स्‍वशासन संस्‍थाओं का उल्‍लेख कर उन्‍हें संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है। 
  • इसमें 18 विषय हैं। 
  • इस अनुसूची को 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ा गया।

संविधान सभा से संबंधित

क्रिप्स योजना  1942 :
  • ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत भेजा गया एक मिशन, जिसका उद्देश्य द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अपने लिए भारत का पूर्ण सहयोग प्राप्त करना था।
  • योजना के तहत यह स्वीकार किया गया कि भारत में एक निर्वाचित संविधान सभा का गठन होगा, जो युद्धोपरांत संविधान का निर्माण करेगी।
  • अध्यक्ष - स्टैफोर्ड क्रिप्स
कैबिनेट मिशन प्लान :
  • वर्ष 1946 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एटली ने भारत में एक 03 सदस्यीय उच्च-स्तरीय मिशन भेजने की घोषणा की।  
  • ब्रिटिश कैबिनेट के 03 सदस्य :
    1. लॉर्ड पैथिक लोरेंस - अध्यक्ष ( उस समय ये भारत सचिव थे )
    2. सर स्टेफर्ड क्रिप्स ( उस समय ये व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष थे )
    3. अलेक्जेंडर ( उस समय ये नौसेना मंत्री थे )
  • कैबिनेट मिशन प्लान 24 March 1946 में भारत पंहुचा।
इसके प्रमुख कार्य  -
  • संविधान सभा का गठन किया गया। ( स्थापना -  6 दिसंबर 1946 को ) 
  • अंतरिम सरकार का गठन किया गया। { गठन - 2 सितंबर 1946, विघटित -15 अगस्त 1947 }
संविधान सभा सीटे
  • जनता द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव जुलाई 1946 सम्पन्न हुए।
कुल सीटे - 389 (10 लाख की आबादी पर एक स्थान का आबंटन किया गया था )
  • ब्रिटिश 11 प्रातों से : 292 सीटे 
  • 04 कमिश्नरी क्षेत्र से - 04 सीटे
  • देशी रियासतों से  - 93 सीटे {इन पर चुनाव नहीं हुए }
  • इनमे आरक्षण सीटे : सामान्य 213 , मुसलमान 79 तथा  सिक्ख 04 
  • संविधान सभा में महिला 15, अनुसूचित जाति 26 और अनुसूचित जनजाति के 33 सदस्य थे।
निर्वाचित हुए : 
  • कुल 296 में से  { कांग्रेस - 208 , मुस्लिम लीग - 73 , अन्य दल - 15 }
  • इनमे किस देशी रियासत के प्रतिनिधि ने भाग नहीं लिया - हैदराबाद
  • लीला रॉय संविधान सभा में बंगाल राज्‍य से इकलौती महिला थी।
  • बेगम क़दसिया ऐज़ाज़ रसूल भारत की संविधान सभा में एकमात्र मुस्लिम महिला थीं।
संविधान सभा की बैठक 

पहली बैठक - 09 दिसंबर 1946 को (दिल्ली में )
  • इसमें 208 सदस्यों ने हिस्सा लिया।
  • प्रथम अध्यक्ष (अस्थायी ) - डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा 
  • मुस्लिम लीग ने बहिष्कार किया, इसलिए बिस्टन चर्चिल ने कहा कि "संविधान सभा एक ऐसा विवाह प्रतीत होता है जिसकी दुल्हन ही गायब है।"
  • देशी रियासतों के सदस्यों ने भाग नहीं लिया।
दुसरी बैठक - 11 दिसंबर 1946 को
  • प्रथम अध्यक्ष ( स्थाई ) - डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
  • सचिव - एच. वी. आर. अयंगर
  • संवैधानिक सलाहकार - बी. एन. राव
  • उपाध्यक्ष - हरेंद्र कुमार मुखर्जी और बीटी कृष्णमाचारी
तीसरी बैठक - 13 दिसंबर 1946 को
  • उद्देश्य प्रस्‍ताव - पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्‍तुत किया गया ( 22 जनवरी 1947 में स्वीकार )
भारत का विभाजन हो गया  { Act 1947 } जिसका निम्न परिणाम हुआ -
  • संविधान सभा का पुनर्गठन ( 31 Oct 1947 )किया गया।
  • सीट की संख्या 299 रह गयी थी। { ब्रिटिश भारत 229 + देशी रियासत 70 }
  • संविधान सभा कार्य बढ़ा : सविधान निर्माण करना + विधायका ( संसद ) की तरह काम करना
  • डॉ भीमराव अम्बेडकर संविधान सभा में बंगाल से निर्वाचित हुए जबकि देश विभाजन के बाद मुंबई के पुणे से सभा में आए, इनके लिए एम आर जयकार ने अपनी सीट खाली की थी।
{ संविधान सभा के कुल 11 सत्र हुए }

अंतिम बैठक / सत्र 24 Jan 1950 
  • 284 सदस्यों ने भारतीय संविधान पर हस्ताक्षर किए।
  • भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद बनाये गए।
  • राष्ट्रगान , राष्ट्रगीत अपनाया - 24 जनवरी, 1950
  1. संविधान निर्माण के लिए संविधान सभा द्वारा 22 समितियां बनाई गई थीं। 
  2. संविधान पर हस्ताक्षर करने वाले भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।
  3. संविधान पर हस्ताक्षर करने वाले देश के पहले व्यक्ति जवाहरलाल नेहरू थे। 
  4. संविधान पर हस्ताक्षर करने वाले अंतिम व्यक्ति संविधान सभा के तत्कालीन अध्यक्ष फिरोज गांधी थे। 
प्रमुख समितियां - उनके अध्यक्ष :
  • संघीय संविधान समिति - जवाहर लाल नेहरू
  • राष्ट्रीय ध्वज संबंधी तदर्थ (Ad Hoc) समिति - राजेन्द्र प्रसाद
  • संचालन समिति - राजेन्द्र प्रसाद
  • मौलिक अधिकार, अल्पसंख्यक एवं जनजातीय - वल्लभ भाई पटेल
  • अपवर्जित क्षेत्रों संबंधी सलाहकार समिति - वल्लभ भाई पटेल
  • मौलिक अधिकारों संबंधी उप -समिति - जे. बी. कृपलानी
  • अल्पसंख्यकों की उप -समिति - एच.सी. मुखर्जी
  • प्रारूप समिति - डॉ भीमराव अम्बेडकर 
प्रारूप समिति में 07 सदस्य थे।  { प्रारूप समिति गठन  - 29 Aug 1947 }
  1. डॉ भीमराव अम्बेडकर ( अध्यक्ष )
  2. ऐन. गोपालस्वामी अयंगर
  3. अल्लादी कृष्णा स्वामी अय्यर
  4. कन्हैया लाल माणिकलाल मुंशी 
  5. बी.एल मित्र {इनके इस्तीफा देने पर N.माधव राव सदस्य बनें }
  6. डी.पी. खेतान { इनकी मृत्यु के बाद कृष्णामाचारी सदस्य बनें }
  7. सैयद मोहम्मद सादुल्ला
  • प्रारूप समिति सभी समितियों में सबसे महत्वपूर्ण थी। संविधान के प्रारूप पर 114 दिन बहस चली, इसने अपनी रिपोर्ट संविधान सभा को पेश की - 21 Feb 1948 }
  •  प्रारूप समिति को निराजुद्दीन अहमद ने अपवहन समिति कहा था। 
परीक्षा उपयोगी तथ्य :
  1. संविधान सभा को किसने मूर्त रूप प्रदान किया ? - जवाहरलाल नेहरु
  2. संविधान सभा को हिन्दुओ का निकाय किसने कहा था ?- लॉर्ड विस्काउंट
  3. संविधान सभा का प्रतीक ( मोहर ) - हाथी
  4. संविधान को बनाने में लगा समय - 2 वर्ष 11 माह 18 दिन
  5. संविधान अंगीकृत ( तैयार ) हुआ ( संविधान दिवस ) - 26 नवंबर, 1949 को
  6. संविधान लागू हुआ - 26 Jan, 1950 को
  7. मूल संविधान सुलेखक (calligrapher) इटैलिक शैली में - प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा
  8. मूल संविधान हिंदी में, चित्र सुलेखक ( Illustrations )- नंदलाल जी
  9. राष्ट्रीय ध्वज का प्रारूप अपनाया गया - 22 जुलाई 1947 को , जिसका डिजाइन बनाया था - पिंगली वेंकैया
  10. सरदार बल्लभभाई पटेल एवं वी.वी. मेनन ने रियासतों को भारत में सम्मिलित करने के लिए सबसे महत्वूर्ण भूमिका निभाई। जूनागढ़ रियासत को जनमत संग्रह के आधार पर, हैदराबाद रियासत को पुलिस बल से और जम्मू-कश्मीर को विलय-पत्र हस्ताक्षर के द्वारा भारत में मिलाया गया।
  11. संविधान निर्माण की सर्वप्रथम मांग बाल गंगाधर तिलक द्वारा 1895 में "स्वराज विधेयक" द्वारा की गई।
  12. किसने कहा कि 'भारतीय संविधान भारतीयों की इच्छानुसार होगा' ? - महात्मा गांधी (1922 ई.)
  13. संविधान सभा के निर्माण पर सर्वप्रथम विचार करने वाली पार्टी राजनैतिक दल - स्वराज पार्टी { ( 1924 में ) ( पार्टी अध्यक्ष चित्तरंजन दास और महासचिव मोतीलाल नेहरु ) }
  14. संविधान सभा के विचार का प्रस्ताव सर्वप्रथम व्यक्तिगत रूप से रखा। - एम एन रॉय ने ( 1934 में )
  15. 1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने संविधान सभा के गठन की आधिकारिक मांग की। 1936 में कांग्रेस ने यह मांग फैजपुर ( महाराष्ट्र )अधिवेशन में रखी जिसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की।
  16. "संविधान का निर्माण वयस्क मताधिकार के आधार पर गठित संविधान सभा के द्वारा किया जायेगा" यह घोषणा की थी ?- जवाहरलाल नेहरु ने (1938 में )

भारतीय संविधान के विदेशी स्त्रोत

भारतीय संविधान के विदेशी स्त्रोत

संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिया गया है :-
  • प्रस्तावना
  • मौलिक अधिकार
  • महाभियोग
  • न्यायिक पुनरावलोकन
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता
  • उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने की विधि 
  • संविधान के संरक्षक के रूप में सर्वोच्च न्यायालय का अधिकार 
सोवियत संघ / रूस के संविधान से लिया गया है :-
  • मौलिक कर्तव्यों का प्रावधान 
जर्मनी के संविधान से लिया गया है :-
  • आपातकाल के प्रवर्तन के दौरान राष्ट्रपति को मौलिक अधिकार संबंधी शक्तियां
ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है :-
  • संसदात्मक शासन प्रणाली
  • एकल नागरिकता
  • विधि का शासन
आयरलैंड के संविधान से लिया गया है :-
  • नीति निर्देशक सिद्धांत
  • राष्ट्रपति के निर्वाचक - मंडल की व्यवस्था
  • राष्ट्रपति द्वारा राज्य सभा में 12 व्यक्तियों का मनोनयन
ऑस्ट्रेलिया के संविधान से लिया गया है :-
  • प्रस्तावना की भाषा
  • समवर्ती सूची का प्रावधान
  • व्यापार-वाणिज्य 
  • संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक
कनाडा के संविधान से लिया गया है :-
  • अवशिष्ट शक्तियों का विचार (अहम शक्तियां केंद्र के पास रहे )
  • संघात्मक शासन प्रणाली { भारत की संघीय व्यवस्था }
  • राज्यपाल की नियुक्ति विषयक प्रक्रिया, 
  • भारत के सर्वोच्च न्यायालय के सलाहकार क्षेत्राधिकार की अवधारणा
दक्षिण अफ्रीका से 
  • संविधान संशोधन की प्रक्रिया प्रावधान 
  • राज्यसभा सदस्यों का निर्वाचन \
फ्रांस के संविधान से लिया गया है :-
  • गणतंत्रात्मक
  • प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समता, बंधुता के आदर्श का सिद्धांत 
इंग्लैण्ड से
  •  कानून के समक्ष समानता
  • भारत में कलेक्टर का पद 
  • विधि निर्माण की प्रक्रिया
  • विशेष संसदीय प्रणाली व्यवस्था इंग्लैण्ड से ली गई है  
  1. विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया कहाँ से लिया गया है ? - जापान से
  2. भारतीय संविधान का सबसे बड़ा एकाकी स्त्रोत है - गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट, 1935

नीति निर्देशक तत्व (भाग-04)

नीति निर्देशक तत्व
{ भाग - 04, 36-51 }

राज्य के नीति निर्देशक तत्व (Directive Principle of State Policy) (DPSP) वे सिद्धांत हैं जिनका पालन करके राज्य को सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक न्याय की व्यवस्था करनी होती है। इन तत्वों का कार्य एक जनकल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है।
  • बेरोज़गारों को शिक्षा और सार्वजनिक सहायता देना
  • बच्चों को स्वस्थ तरीके से विकसित करने के लिए अवसर और सुविधाएं मुहैया कराना
  • अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, और दूसरे कमज़ोर वर्गों के लिए शिक्षा और आर्थिक हितों को बढ़ावा देना
  • पर्यावरण की सुरक्षा और सुधार करना
  • समान काम के लिए समान वेतन देना

Article 36 : राज्य की परिभाषा - वही जो भाग-3 के अनुच्छेद 12 में है।

Article 37 : इसे न्यायालय के द्वारा लागु नहीं कराया जा सकता है। यह न्यायलय द्वारा परिवर्तनीय भी नहीं है।

Article 38 : लोक कल्याण की अभिवृति अथार्त सरकार जनता के लिए व्यवस्था बनाएगी जिससे सामाजिक , राजनैतिक , तथा आर्थिक न्याय मिलेगी।

Article 39 : सामान कार्य के लिए स्त्री और पुरुष को सामान वेतन।

Article 39क : निशुल्क विधिक सहायता।

Article  40 : ग्राम पंचायत का संगठन।

Article 41 : कुल दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता उपलब्ध करना।

Article 42 : न्याय संगत कार्यों की मनोचित दशा और प्रसूति सहायता उपलब्ध करना।

Article 43 : निर्वाह योग मजदूरी - मजदूरों को इतना वेतन दिया जाये की उसका परिवार चल सके।

Article 44 : सामान सिविल संहिता - इसे लागु करना राज्य इसे लागु कर सकती है या नहीं भी कर सकती है।

Article 45 : 6 वर्षो से काम आयु के बच्चो के स्वास्थ्य के ध्यान रखना राज्य की जिम्मेदारी है और 6 - 14 वर्षो के आयु के बच्चों को शिक्षा देना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

Article 46 : अनुसूचित जाती , अनुसूचित जनजाति तथा अत्यंत पिछड़ा वर्गों तथा अन्य दुर्बल वर्गों के लिए शिक्षा और लोक नियोजन में विशेष आरक्षण ।

Article  47 : सरकार पोषायुक्त आहार उपलब्ध कराएगी तथा नशीली पदार्थो पर प्रतिबंध लगाएगी।

Article 48 : पशुपालन और कृषि का संगठन।

Article 48क : पर्यावरण और वन्य जीव की रक्षा। - राज्य पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने और देश के वनों और वन्यजीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा।

Article  49 : राष्ट्रीय स्मारकों , स्थानों अवं वस्तुओं की रक्षा सरकार का कर्तव्य है।

Article 50 : कार्यपालिका एवं न्यायपालिका को अलग करना।

Article  51 : अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देना।

Exam Point :
  1. ग्रेनविल ऑस्टिन ने राज्य के DPSP को संविधान की आत्मा बतलाया था।
  2. डॉ. भीमराव अंबेडकर ने DPSP को भारतीय संविधान की 'आदर्श विशेषताएँ' कहा है।
  3. के.टी. शाह का कथन है कि "राज्य के नीति-निदेशक तत्व एक ऐसा चेक है जो बैंक की सुविधानुसार अदा किया जाता है।"